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क्रिप्टो फ्यूचर्स में फंडिंग रेट क्या है और यह कैसे काम करता है?

By जुलाई 20, 2026अनुमानित पढ़ने का समय: 11 मिनट
क्रिप्टो फ्यूचर्स में फंडिंग रेट क्या है और यह कैसे काम करता है?

Table of Contents

क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में फंडिंग रेट एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। यह परपेचुअल फ्यूचर्स अनुबंध की कीमत को संबंधित क्रिप्टो की स्पॉट कीमत के करीब बनाए रखने में मदद करती है।

फंडिंग रेट कोई सामान्य ट्रेडिंग शुल्क नहीं है। यह एक निश्चित समय के बाद होने वाला भुगतान है, जो लॉन्ग और शॉर्ट पोज़िशन रखने वाले ट्रेडर्स के बीच होता है।

फंडिंग रेट को समझने से ट्रेडर्स को बाजार की धारणा, एकतरफा पोज़िशन और लीवरेज की स्थिति का बेहतर अंदाजा मिल सकता है।

संक्षेप में

  • फंडिंग रेट परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होने वाला नियमित भुगतान है।
  • इसका उद्देश्य फ्यूचर्स कीमत को संबंधित स्पॉट कीमत के करीब बनाए रखना है।
  • सकारात्मक फंडिंग रेट होने पर लॉन्ग ट्रेडर्स, शॉर्ट ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।
  • नकारात्मक फंडिंग रेट होने पर शॉर्ट ट्रेडर्स, लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।
  • फंडिंग भुगतान कुल पोज़िशन मूल्य पर निकाला जाता है, केवल मार्जिन पर नहीं।
  • फंडिंग का निपटान आमतौर पर तय अंतराल पर होता है, जैसे हर 8 घंटे में।

क्रिप्टो फ्यूचर्स में फंडिंग रेट क्या है?

फंडिंग रेट एक नियमित भुगतान है, जो परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट पोज़िशन रखने वाले ट्रेडर्स के बीच होता है।

इसका मुख्य उद्देश्य परपेचुअल फ्यूचर्स अनुबंध की कीमत और संबंधित क्रिप्टो की स्पॉट कीमत के बीच अंतर को नियंत्रित करना है।

मान लीजिए बिटकॉइन की स्पॉट कीमत और परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत के बीच बड़ा अंतर आ गया है। फंडिंग रेट ट्रेडर्स को ऐसी पोज़िशन लेने के लिए प्रेरित करता है, जो दोनों कीमतों को दोबारा करीब लाने में मदद करें।

फंडिंग भुगतान आमतौर पर एक्सचेंज अपने पास नहीं रखता। यह बाजार की एक तरफ के ट्रेडर्स से दूसरी तरफ के ट्रेडर्स को दिया जाता है।

फंडिंग रेट की जरूरत क्यों होती है?

फंडिंग रेट की जरूरत इसलिए होती है क्योंकि परपेचुअल फ्यूचर्स अनुबंधों की कोई समाप्ति तारीख नहीं होती।

पारंपरिक फ्यूचर्स अनुबंध एक तय तारीख पर समाप्त होते हैं। जैसे-जैसे समाप्ति तारीख करीब आती है, फ्यूचर्स कीमत सामान्य रूप से स्पॉट कीमत के करीब आने लगती है।

इसे कीमतों का मिलान कहा जाता है।

लेकिन परपेचुअल फ्यूचर्स कभी समाप्त नहीं होते। इसलिए इनमें ऐसी कोई स्वाभाविक व्यवस्था नहीं होती, जो अनुबंध की कीमत को स्पॉट कीमत के करीब आने के लिए मजबूर करे।

अगर कोई व्यवस्था न हो, तो परपेचुअल फ्यूचर्स की कीमत लंबे समय तक स्पॉट कीमत से काफी ऊपर या नीचे रह सकती है।

फंडिंग रेट इसी समस्या को हल करता है।

ट्रेडिशनल फ्यूचर्स और परपेचुअल फ्यूचर्स में क्या अंतर है?

पारंपरिक फ्यूचर्स और परपेचुअल फ्यूचर्स दोनों किसी संबंधित संपत्ति की कीमत पर आधारित अनुबंध होते हैं। लेकिन दोनों की बनावट अलग होती है।

आधारपारंपरिक फ्यूचर्सपरपेचुअल फ्यूचर्स
समाप्ति तारीखहोती हैनहीं होती
कीमतों का मिलानसमाप्ति के करीब होता हैफंडिंग रेट के जरिए होता है
पोज़िशन की अवधिसमाप्ति तक सीमितट्रेडर जब तक पोज़िशन रखे
नियमित फंडिंग भुगतानआमतौर पर नहींलागू हो सकता है

पारंपरिक फ्यूचर्स में समाप्ति तारीख कीमत को स्पॉट बाजार के करीब लाती है।

परपेचुअल फ्यूचर्स में फंडिंग रेट यही भूमिका निभाता है। यह ट्रेडर्स के लिए आर्थिक प्रोत्साहन तैयार करता है, जिससे फ्यूचर्स और स्पॉट कीमत के बीच अंतर कम हो सके।

फंडिंग रेट कैसे काम करता है?

फंडिंग रेट इस बात पर निर्भर करता है कि परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत, स्पॉट या सूचकांक कीमत के मुकाबले कहां चल रही है।

इसके 2 मुख्य मामले होते हैं।

जब फ्यूचर्स कीमत, स्पॉट कीमत से अधिक होती है

जब परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत, स्पॉट कीमत से ऊपर चलती है, तो फंडिंग रेट आमतौर पर सकारात्मक होता है।

इस स्थिति में:

  • लॉन्ग ट्रेडर्स फंडिंग भुगतान करते हैं।
  • शॉर्ट ट्रेडर्स फंडिंग भुगतान प्राप्त करते हैं।
  • नई शॉर्ट पोज़िशन लेने का प्रोत्साहन बढ़ता है।
  • कुछ लॉन्ग ट्रेडर्स अपनी पोज़िशन बंद कर सकते हैं।

इससे फ्यूचर्स बाजार में दबाव बनता है और अनुबंध की कीमत स्पॉट कीमत के करीब आने लगती है।

उदाहरण के लिए, अगर बिटकॉइन की स्पॉट कीमत ₹60,00,000 है, लेकिन परपेचुअल फ्यूचर्स अनुबंध ₹60,50,000 पर चल रहा है, तो फ्यूचर्स बाजार स्पॉट से ऊंचे स्तर पर है।

ऐसी स्थिति में सकारात्मक फंडिंग रेट लागू हो सकता है।

जब फ्यूचर्स कीमत, स्पॉट कीमत से कम होती है

जब परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत, स्पॉट कीमत से नीचे चलती है, तो फंडिंग रेट आमतौर पर नकारात्मक होता है।

इस स्थिति में:

  • शॉर्ट ट्रेडर्स फंडिंग भुगतान करते हैं।
  • लॉन्ग ट्रेडर्स फंडिंग भुगतान प्राप्त करते हैं।
  • नई लॉन्ग पोज़िशन लेने का प्रोत्साहन बढ़ता है।
  • कुछ शॉर्ट ट्रेडर्स अपनी पोज़िशन बंद कर सकते हैं।

इससे फ्यूचर्स कीमत पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है और अनुबंध की कीमत स्पॉट कीमत के करीब आ सकती है।

सकारात्मक और नकारात्मक फंडिंग रेट का क्या मतलब है?

बाजार की स्थितिफंडिंग रेटकौन भुगतान करता है?किसे भुगतान मिलता है?
फ्यूचर्स कीमत स्पॉट कीमत से अधिकसकारात्मकलॉन्ग ट्रेडर्सशॉर्ट ट्रेडर्स
फ्यूचर्स कीमत स्पॉट कीमत से कमनकारात्मकशॉर्ट ट्रेडर्सलॉन्ग ट्रेडर्स

सकारात्मक फंडिंग रेट अक्सर यह दिखाता है कि बाजार में लॉन्ग पोज़िशन अधिक हैं।

नकारात्मक फंडिंग रेट यह संकेत दे सकता है कि शॉर्ट पोज़िशन अधिक हैं।

हालांकि, केवल फंडिंग रेट देखकर बाजार की अगली दिशा तय नहीं की जा सकती। इसे कीमत की चाल, ओपन इंटरेस्ट, ट्रेडिंग मात्रा और अन्य संकेतकों के साथ देखना चाहिए।

फंडिंग रेट किसे फायदा पहुंचाता है?

फंडिंग रेट उस तरफ के ट्रेडर्स को भुगतान देता है, जो फ्यूचर्स कीमत को स्पॉट कीमत के करीब लाने में मदद कर रही होती है।

अगर लॉन्ग पोज़िशन बहुत अधिक हैं और फ्यूचर्स कीमत स्पॉट से ऊपर है, तो लॉन्ग ट्रेडर्स शॉर्ट ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।

अगर शॉर्ट पोज़िशन अधिक हैं और फ्यूचर्स कीमत स्पॉट से नीचे है, तो शॉर्ट ट्रेडर्स लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।

इस तरह फंडिंग रेट भीड़ वाली तरफ पर नियमित लागत लगाता है और दूसरी तरफ को प्रोत्साहन देता है।

क्या फंडिंग रेट हमेशा समान रहता है?

नहीं।

फंडिंग रेट बाजार की स्थिति के अनुसार बदलता रहता है। सामान्य परिस्थितियों में यह छोटा हो सकता है, जैसे 0.01% या 0.03% प्रति फंडिंग अंतराल।

लेकिन जब बाजार में लीवरेज बहुत अधिक हो या एक दिशा में पोज़िशन की संख्या ज्यादा हो, तो फंडिंग रेट काफी बढ़ सकता है।

फंडिंग रेट सकारात्मक, नकारात्मक या कभी-कभी लगभग 0 भी हो सकता है।

अगले भाग में हम समझेंगे कि फंडिंग रेट कैसे निकाला जाता है, प्रीमियम सूचकांक और ब्याज दर घटक क्या होते हैं, और फंडिंग भुगतान का पूरा उदाहरण कैसे निकाला जाता है।

फंडिंग रेट कैसे निकाला जाता है?

फंडिंग रेट तय करने की प्रक्रिया के दो मुख्य हिस्से होते हैं।

पहला, एक्सचेंज यह तय करता है कि मौजूदा बाजार की स्थिति के अनुसार फंडिंग रेट कितना होना चाहिए।

दूसरा, तय समय आने पर उसी फंडिंग रेट के आधार पर लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच भुगतान होता है।

इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत और स्पॉट कीमत के बीच अंतर को कम करना होता है।

फंडिंग रेट किन चीजों पर निर्भर करता है?

अधिकांश एक्सचेंज फंडिंग रेट तय करने के लिए मुख्य रूप से दो घटकों का इस्तेमाल करते हैं।

  • प्रीमियम सूचकांक
  • ब्याज दर घटक

इन दोनों के आधार पर अंतिम फंडिंग रेट निकाला जाता है।

प्रीमियम सूचकांक क्या होता है?

प्रीमियम सूचकांक यह मापता है कि परपेचुअल फ्यूचर्स अनुबंध की कीमत, स्पॉट या संदर्भ सूचकांक कीमत से कितनी अलग चल रही है।

अगर फ्यूचर्स कीमत स्पॉट कीमत से ऊपर है, तो प्रीमियम सकारात्मक माना जाता है।

अगर फ्यूचर्स कीमत स्पॉट कीमत से नीचे है, तो प्रीमियम नकारात्मक माना जाता है।

यही अंतर फंडिंग रेट तय करने का सबसे महत्वपूर्ण संकेत होता है।

ब्याज दर घटक क्या होता है?

फंडिंग रेट में एक छोटा ब्याज दर घटक भी शामिल हो सकता है।

यह आमतौर पर बहुत छोटा होता है और कई प्लेटफ़ॉर्म पर लगभग 0.01% से 0.03% प्रति फंडिंग अंतराल के बीच रहता है।

सामान्य परिस्थितियों में फंडिंग रेट पर इसका प्रभाव सीमित होता है। अधिकतर बदलाव प्रीमियम सूचकांक के कारण आते हैं।

कुछ एक्सचेंज अत्यधिक भुगतान से बचने के लिए फंडिंग रेट की अधिकतम सीमा भी तय करते हैं।

फंडिंग भुगतान कैसे निकाला जाता है?

फंडिंग भुगतान निकालने का सबसे आसान तरीका यह है:

फंडिंग भुगतान = कुल पोज़िशन मूल्य × फंडिंग रेट

ध्यान रखें कि यह भुगतान केवल आपके मार्जिन पर नहीं, बल्कि पूरी पोज़िशन के मूल्य पर निकाला जाता है।

इसी वजह से छोटे फंडिंग रेट का भी बड़ी पोज़िशन पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है।

उदाहरण से समझें

मान लीजिए:

  • बिटकॉइन की कीमत: ₹6,300,000
  • पोज़िशन का आकार: 0.002 बिटकॉइन
  • कुल पोज़िशन मूल्य: ₹12,600
  • फंडिंग रेट: 0.03%

ऐसी स्थिति में:

₹12,600 × 0.0003 = ₹3.78

अगर फंडिंग रेट सकारात्मक है, तो लॉन्ग ट्रेडर लगभग ₹3.78 का भुगतान करेगा और शॉर्ट ट्रेडर उतनी ही राशि प्राप्त करेगा।

अगर फंडिंग रेट नकारात्मक होता, तो यही भुगतान शॉर्ट ट्रेडर करता और लॉन्ग ट्रेडर प्राप्त करता।

उदाहरण सारणी

घटकउदाहरण
बिटकॉइन की कीमत₹6,300,000
पोज़िशन का आकार0.002 बिटकॉइन
कुल पोज़िशन मूल्य₹12,600
फंडिंग रेट0.03%
फंडिंग भुगतान₹3.78

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि फंडिंग भुगतान हमेशा कुल पोज़िशन मूल्य पर आधारित होता है।

फंडिंग का निपटान कब होता है?

फंडिंग रेट लगातार बदल सकता है, लेकिन उसका भुगतान केवल तय समय पर होता है।

कई एक्सचेंजों पर यह हर 8 घंटे में होता है।

उदाहरण के लिए, किसी प्लेटफ़ॉर्म पर फंडिंग का समय 5:30 AM, 1:30 PM और 9:30 PM हो सकता है। अलग-अलग एक्सचेंजों का समय अलग हो सकता है।

अगर आप फंडिंग समय से पहले अपनी पोज़िशन बंद कर देते हैं, तो आमतौर पर उस अंतराल का फंडिंग भुगतान नहीं करना पड़ता और न ही आपको कोई भुगतान मिलता है।

सकारात्मक और नकारात्मक फंडिंग रेट का सारांश

फ्यूचर्स कीमतफंडिंग रेटभुगतान कौन करता है?भुगतान किसे मिलता है?बाजार की धारणा
स्पॉट कीमत से अधिकसकारात्मकलॉन्ग ट्रेडर्सशॉर्ट ट्रेडर्सतेजी
स्पॉट कीमत से कमनकारात्मकशॉर्ट ट्रेडर्सलॉन्ग ट्रेडर्समंदी

क्या छोटा फंडिंग रेट भी महत्वपूर्ण हो सकता है?

हां। पहली नज़र में 0.01% या 0.03% का फंडिंग रेट बहुत छोटा लग सकता है।

लेकिन अगर आपकी पोज़िशन बड़ी है या आपने अधिक लीवरेज लिया है, तो यह भुगतान समय के साथ बढ़ सकता है।

इसी कारण अनुभवी ट्रेडर्स केवल कीमत पर नहीं, बल्कि फंडिंग रेट पर भी लगातार नजर रखते हैं।

अगले भाग में हम समझेंगे कि अनुभवी ट्रेडर्स फंडिंग रेट का उपयोग बाजार की धारणा समझने, संभावित ट्रेंड बदलने के संकेत पहचानने और फंडिंग आर्बिट्राज जैसी रणनीतियों में कैसे करते हैं।

ट्रेडर्स फंडिंग रेट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?

अनुभवी ट्रेडर्स फंडिंग रेट को केवल एक भुगतान व्यवस्था के रूप में नहीं देखते। वे इसे बाजार की धारणा, लीवरेज और पोज़िशनिंग को समझने वाले महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

फंडिंग रेट यह बता सकता है कि बाजार में किस तरफ अधिक भीड़ है और क्या कीमत में तेज उतार-चढ़ाव आने की संभावना बढ़ रही है।

भीड़ वाली पोज़िशन की पहचान

अगर फंडिंग रेट लगातार बहुत अधिक सकारात्मक बना रहता है, तो इसका मतलब हो सकता है कि बड़ी संख्या में ट्रेडर्स लॉन्ग पोज़िशन लेकर कीमत बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

ऐसी स्थिति में बाजार एकतरफा हो सकता है। अगर अचानक कीमत गिरती है, तो बड़ी संख्या में लॉन्ग पोज़िशन बंद हो सकती हैं और गिरावट तेज हो सकती है।

इसी तरह, अगर फंडिंग रेट लंबे समय तक बहुत अधिक नकारात्मक रहे, तो यह संकेत हो सकता है कि बाजार में शॉर्ट पोज़िशन की संख्या अधिक है।

अगर कीमत अचानक ऊपर जाती है, तो शॉर्ट पोज़िशन बंद होने से तेजी और बढ़ सकती है।

संभावित ट्रेंड बदलने के संकेत

कई बार फंडिंग रेट अपने सामान्य स्तर से काफी ऊपर या नीचे चला जाता है।

ऐसी स्थिति यह दिखा सकती है कि बाजार में एक दिशा में अत्यधिक लीवरेज इस्तेमाल हो रहा है।

हालांकि, केवल फंडिंग रेट के आधार पर ट्रेंड बदलने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। इसे कीमत की चाल, ओपन इंटरेस्ट, ट्रेडिंग मात्रा और अन्य संकेतकों के साथ मिलाकर देखना बेहतर होता है।

फंडिंग आर्बिट्राज क्या है?

कुछ अनुभवी ट्रेडर्स फंडिंग आर्बिट्राज नाम की रणनीति का इस्तेमाल करते हैं।

इसमें ट्रेडर एक तरफ स्पॉट बाजार में क्रिप्टो होल्ड करता है और दूसरी तरफ परपेचुअल फ्यूचर्स में विपरीत पोज़िशन लेता है।

अगर फंडिंग रेट लगातार सकारात्मक है, तो कुछ परिस्थितियों में ट्रेडर नियमित फंडिंग भुगतान प्राप्त कर सकता है।

हालांकि, इस रणनीति में भी जोखिम होते हैं। इसमें ट्रेडिंग शुल्क, फंडिंग रेट में बदलाव, कीमतों का अंतर और निष्पादन से जुड़ी चुनौतियों को समझना जरूरी है।

फंडिंग रेट को नजरअंदाज क्यों नहीं करना चाहिए?

कई ट्रेडर्स केवल कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन फंडिंग रेट भी किसी पोज़िशन की कुल लागत को प्रभावित कर सकता है।

अगर फंडिंग रेट लंबे समय तक सकारात्मक रहता है, तो लॉन्ग पोज़िशन बनाए रखने की लागत बढ़ सकती है।

वहीं, लंबे समय तक नकारात्मक फंडिंग रेट रहने पर शॉर्ट पोज़िशन रखने वाले ट्रेडर्स पर अतिरिक्त लागत आ सकती है।

इसीलिए फंडिंग रेट को समझना जोखिम प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

फंडिंग रेट उपयोगी संकेतक है, लेकिन इसे अकेले इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले इन बातों की भी जांच करें:

  • कीमत का ट्रेंड
  • ओपन इंटरेस्ट
  • ट्रेडिंग मात्रा
  • लीवरेज का स्तर
  • प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तर
  • व्यापक बाजार की स्थिति

इन सभी संकेतकों को साथ में देखने से बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

फंडिंग रेट परपेचुअल फ्यूचर्स बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फ्यूचर्स कीमत को स्पॉट कीमत के करीब बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही बाजार की धारणा तथा लीवरेज की स्थिति की जानकारी भी देता है।

सकारात्मक फंडिंग रेट आमतौर पर लॉन्ग पोज़िशन की अधिकता का संकेत देता है, जबकि नकारात्मक फंडिंग रेट शॉर्ट पोज़िशन की अधिकता दिखा सकता है।

हालांकि, फंडिंग रेट को कभी भी अकेले ट्रेडिंग संकेतक के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बेहतर निर्णय के लिए इसे कीमत की चाल, ओपन इंटरेस्ट और अन्य तकनीकी संकेतकों के साथ मिलाकर देखना चाहिए।

फंडिंग रेट को समझने से आप केवल कीमत की दिशा नहीं, बल्कि पूरे डेरिवेटिव बाजार की संरचना को भी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

याद रखने योग्य मुख्य बातें

  • फंडिंग रेट परपेचुअल फ्यूचर्स कीमत को स्पॉट कीमत के करीब रखने में मदद करता है।
  • यह भुगतान सीधे लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होता है।
  • सकारात्मक फंडिंग रेट में लॉन्ग ट्रेडर्स भुगतान करते हैं।
  • नकारात्मक फंडिंग रेट में शॉर्ट ट्रेडर्स भुगतान करते हैं।
  • फंडिंग भुगतान कुल पोज़िशन मूल्य पर आधारित होता है।
  • अत्यधिक सकारात्मक या नकारात्मक फंडिंग रेट बाजार में अधिक लीवरेज और संभावित अस्थिरता का संकेत दे सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्रिप्टो फ्यूचर्स में फंडिंग रेट क्या होता है?

फंडिंग रेट परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होने वाला नियमित भुगतान है। इसका उद्देश्य फ्यूचर्स कीमत को स्पॉट कीमत के करीब बनाए रखना है।

2. फंडिंग रेट का भुगतान किसे किया जाता है?

फंडिंग भुगतान सीधे ट्रेडर्स के बीच होता है। एक्सचेंज केवल इस प्रक्रिया को संचालित करता है और सामान्यतः यह भुगतान अपने पास नहीं रखता।

3. फंडिंग रेट कितनी बार लागू होता है?

यह एक्सचेंज के नियमों पर निर्भर करता है। कई प्लेटफ़ॉर्म पर इसका निपटान हर 8 घंटे में होता है।

4. क्या फंडिंग रेट नकारात्मक भी हो सकता है?

हां। जब फ्यूचर्स कीमत स्पॉट कीमत से नीचे होती है, तो फंडिंग रेट नकारात्मक हो सकता है। ऐसी स्थिति में शॉर्ट ट्रेडर्स, लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।

5. क्या फंडिंग रेट मेरे मुनाफे और नुकसान को प्रभावित करता है?

हां। अगर आप लंबे समय तक पोज़िशन बनाए रखते हैं, तो फंडिंग भुगतान आपके कुल परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

6. क्या केवल फंडिंग रेट देखकर ट्रेड करना सही है?

नहीं। फंडिंग रेट एक महत्वपूर्ण संकेतक है, लेकिन इसे कीमत की चाल, ओपन इंटरेस्ट, ट्रेडिंग मात्रा और अन्य तकनीकी संकेतकों के साथ मिलाकर देखना चाहिए।

अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

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