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क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मार्जिन क्या है? (What is Margin in Crypto Futures Trading?)

By अगस्त 6, 2026अनुमानित पढ़ने का समय: 11 मिनट
क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मार्जिन क्या है?

Table of Contents

क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मार्जिन वह रकम है, जिसे किसी लेवरेज्ड पोजीशन को खोलने और बनाए रखने के लिए जमानत के रूप में जमा किया जाता है। यह पूरी पोजीशन की कीमत नहीं होती, बल्कि उसका एक हिस्सा होती है।

मार्जिन की मदद से कम रकम का इस्तेमाल करके बड़ी पोजीशन खोली जा सकती है। लेकिन पोजीशन का मुनाफा और नुकसान उसके पूरे आकार पर तय होता है। इसलिए मार्जिन को समझे बिना लेवरेज इस्तेमाल करना लिक्विडेशन का जोखिम बढ़ा सकता है।

संक्षेप में

  • मार्जिन किसी फ्यूचर्स पोजीशन को खोलने और बनाए रखने के लिए जमा की गई जमानत है।
  • शुरुआती मार्जिन पोजीशन खोलने के लिए जरूरी रकम होती है।
  • मेंटेनेंस मार्जिन पोजीशन को खुला रखने के लिए जरूरी न्यूनतम रकम होती है।
  • ज्यादा लेवरेज से शुरुआती मार्जिन कम होता है, लेकिन लिक्विडेशन का जोखिम बढ़ता है।
  • आइसोलेटेड मार्जिन में केवल उस पोजीशन के लिए तय रकम जोखिम में रहती है।
  • क्रॉस मार्जिन में उपलब्ध फ्यूचर्स वॉलेट बैलेंस कई पोजीशन को सहारा दे सकता है।
  • लिक्विडेशन आमतौर पर मार्क प्राइस और मेंटेनेंस मार्जिन के आधार पर शुरू होती है।

क्रिप्टो फ्यूचर्स में मार्जिन क्या होता है?

मार्जिन वह पूंजी है, जिसे फ्यूचर्स ट्रेड खोलने और चालू रखने के लिए एक्सचेंज के पास सुरक्षा राशि के रूप में रखा जाता है।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में ट्रेडर को पूरी पोज़िशन की रकम जमा करने की जरूरत नहीं होती। वह कुल पोज़िशन के मूल्य का एक हिस्सा मार्जिन के रूप में देता है और लीवरेज की मदद से बड़ी पोज़िशन नियंत्रित करता है।

मान लीजिए आप ₹1,00,000 की बिटकॉइन फ्यूचर्स पोज़िशन खोलना चाहते हैं। अगर आप 10 गुना लीवरेज चुनते हैं, तो आपको लगभग ₹10,000 जमा करने पड़ सकते हैं।

इस उदाहरण में:

  • कुल पोज़िशन: ₹1,00,000
  • लीवरेज: 10 गुना
  • जरूरी मार्जिन: लगभग ₹10,000

मार्जिन ट्रेडर की पोज़िशन के लिए सुरक्षा राशि की तरह काम करता है। अगर बाजार पोज़िशन की विपरीत दिशा में जाता है, तो नुकसान इसी मार्जिन से घटाया जाता है।

क्रिप्टो फ्यूचर्स में मार्जिन कैसे काम करता है?

मार्जिन ट्रेडिंग की प्रक्रिया को 4 चरणों में समझा जा सकता है।

1. फ्यूचर्स वॉलेट में फंड जोड़ना

सबसे पहले ट्रेडर अपने फ्यूचर्स वॉलेट में जमानत के रूप में इस्तेमाल होने वाली रकम जोड़ता है। रुपये में सेटल होने वाले फ्यूचर्स में यह रकम रुपये में हो सकती है।

WazirX पर ट्रेडर स्पॉट और फ्यूचर्स वॉलेट के बीच फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। WazirX के रुपये में सेटल होने वाले फ्यूचर्स में मार्जिन तथा मुनाफे या नुकसान का सेटलमेंट रुपये में होता है।

2. लेवरेज चुनना

लेवरेज यह तय करता है कि उपलब्ध मार्जिन से कितनी बड़ी पोजीशन खोली जा सकती है।

मार्जिनलेवरेजपोजीशन का आकार
₹10,0002 गुना₹20,000
₹10,0005 गुना₹50,000
₹10,00010 गुना₹1,00,000
₹10,00020 गुना₹2,00,000

लेवरेज बढ़ने से पोजीशन का आकार बढ़ता है। इसके साथ ही कीमत की छोटी चाल का असर भी मार्जिन पर ज्यादा होता है।

जुलाई 2026 तक WazirX के पात्र फ्यूचर्स मार्केट में 100 गुना तक लेवरेज उपलब्ध हो सकता है। उपलब्ध अधिकतम लेवरेज कॉन्ट्रैक्ट और पात्रता के अनुसार अलग हो सकता है।

ज्यादा लेवरेज संभावित मुनाफे और नुकसान दोनों को तेजी से बढ़ाता है।

3. मुनाफे और नुकसान में बदलाव

पोजीशन खुलने के बाद बाजार की कीमत बदलने के साथ अनरियलाइज्ड मुनाफा या नुकसान भी बदलता रहता है।

अगर बाजार आपकी पोजीशन के विपरीत जाता है, तो अनरियलाइज्ड नुकसान बढ़ता है और आपकी उपलब्ध मार्जिन इक्विटी कम हो सकती है।

अगर इक्विटी मेंटेनेंस मार्जिन के करीब पहुंच जाती है, तो पोजीशन लिक्विडेशन के जोखिम में आ सकती है।

4. पोजीशन बंद होना

पोजीशन इन तरीकों से बंद हो सकती है:

  • ट्रेडर खुद पोजीशन बंद करे
  • टेक प्रॉफिट ऑर्डर पूरा हो
  • स्टॉप लॉस ट्रिगर हो
  • एक्सचेंज पोजीशन को लिक्विडेट कर दे

लिक्विडेशन तब हो सकती है, जब पोजीशन को सहारा देने वाली इक्विटी जरूरी मेंटेनेंस मार्जिन तक गिर जाती है।

शुरुआती मार्जिन क्या होता है?

शुरुआती मार्जिन वह न्यूनतम रकम है, जिसकी जरूरत किसी फ्यूचर्स पोजीशन को खोलने के लिए होती है।

इसकी सामान्य गणना इस प्रकार की जा सकती है:

शुरुआती मार्जिन = पोजीशन की कुल कीमत ÷ लेवरेज

मान लीजिए आप ₹2,00,000 की पोजीशन खोलना चाहते हैं:

लेवरेजअनुमानित शुरुआती मार्जिन
2 गुना₹1,00,000
5 गुना₹40,000
10 गुना₹20,000
20 गुना₹10,000

जैसे जैसे लेवरेज बढ़ता है, जरूरी शुरुआती मार्जिन कम होता जाता है। हालांकि, इससे लिक्विडेशन प्राइस आमतौर पर एंट्री प्राइस के ज्यादा करीब आ जाती है।

फीस, कॉन्ट्रैक्ट के जोखिम नियम और दूसरे समायोजन के कारण प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई वास्तविक रकम इस सामान्य गणना से थोड़ी अलग हो सकती है।

मेंटेनेंस मार्जिन क्या होता है?

मेंटेनेंस मार्जिन वह न्यूनतम इक्विटी है, जिसे पोजीशन को खुला रखने के लिए बनाए रखना जरूरी होता है।

यह शुरुआती मार्जिन से कम होती है। शुरुआती मार्जिन पोजीशन खोलती है, जबकि मेंटेनेंस मार्जिन यह तय करने में मदद करती है कि पोजीशन कितने नुकसान तक खुली रह सकती है।

मान लीजिए:

जानकारीरकम
शुरुआती मार्जिन₹10,000
मेंटेनेंस मार्जिन₹3,000
अनरियलाइज्ड नुकसान₹7,000
बची हुई इक्विटी₹3,000

जब इक्विटी मेंटेनेंस मार्जिन के स्तर तक पहुंचती है, तो एक्सचेंज लिक्विडेशन शुरू कर सकता है।

मेंटेनेंस मार्जिन कोई एक निश्चित प्रतिशत नहीं होती। यह एक्सचेंज, कॉन्ट्रैक्ट, पोजीशन के आकार और जोखिम स्तर के अनुसार बदल सकती है।

इसलिए ऑर्डर की पुष्टि करने से पहले प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई मेंटेनेंस मार्जिन और लिक्विडेशन प्राइस जांचनी चाहिए।

शुरुआती मार्जिन और मेंटेनेंस मार्जिन में क्या अंतर है?

आधारशुरुआती मार्जिनमेंटेनेंस मार्जिन
उद्देश्यपोजीशन खोलनापोजीशन को खुला रखना
कब जरूरी होती हैट्रेड शुरू करते समयपोजीशन खुली रहने के दौरान
सामान्य स्तरज्यादाशुरुआती मार्जिन से कम
लेवरेज का असरज्यादा लेवरेज से कम होती हैकॉन्ट्रैक्ट और पोजीशन के आकार पर निर्भर
कमी होने का परिणामपोजीशन नहीं खुलेगीलिक्विडेशन शुरू हो सकती है

शुरुआती और मेंटेनेंस मार्जिन के बीच का अंतर पोजीशन के लिए एक प्रकार का जोखिम बचाव होता है।

ज्यादा लेवरेज इस बचाव को छोटा कर देता है। इसलिए बाजार की छोटी विपरीत चाल भी पोजीशन को लिक्विडेशन के करीब ला सकती है।

लेवरेज मार्जिन को कैसे प्रभावित करता है?

लेवरेज आपकी बाजार में कुल पोजीशन का आकार बढ़ाता है। यह मार्जिन को मुफ्त पूंजी में नहीं बदलता और न ही नुकसान को सीमित करता है।

मान लीजिए आपके पास ₹10,000 हैं:

लेवरेजअनुमानित शुरुआती मार्जिनलेवरेज
2 गुना₹1,00,0002 गुना
5 गुना₹40,0005 गुना
10 गुना₹20,00010 गुना
20 गुना₹10,00020 गुना

समान बाजार चाल में ज्यादा लेवरेज के साथ मार्जिन पर नुकसान का असर ज्यादा होता है।

इसी कारण अधिकतम उपलब्ध लेवरेज का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। पोजीशन का आकार आपकी जोखिम सीमा के अनुसार तय होना चाहिए।

क्रॉस मार्जिन क्या है?

क्रॉस मार्जिन में फ्यूचर्स वॉलेट का उपलब्ध बैलेंस खुली पोजीशन के लिए साझा जमानत की तरह काम करता है।

अगर किसी पोजीशन में नुकसान बढ़ता है, तो सिस्टम उपलब्ध वॉलेट बैलेंस का इस्तेमाल करके उसे कुछ समय तक सहारा दे सकता है। इससे उस पोजीशन की तत्काल लिक्विडेशन का जोखिम कम हो सकता है।

लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि एक बड़ी नुकसान वाली पोजीशन वॉलेट के दूसरे फंड को भी जोखिम में डाल सकती है।

उदाहरण के लिए, आपके फ्यूचर्स वॉलेट में ₹50,000 हैं और आपने किसी पोजीशन के लिए शुरुआत में ₹10,000 मार्जिन इस्तेमाल किया है।

क्रॉस मार्जिन में जरूरत पड़ने पर बाकी उपलब्ध बैलेंस भी उस पोजीशन को सहारा दे सकता है।

इसलिए क्रॉस मार्जिन में संभावित नुकसान केवल शुरुआती ₹10,000 तक सीमित नहीं रह सकता।

आइसोलेटेड मार्जिन क्या है?

आइसोलेटेड मार्जिन में एक निश्चित रकम केवल एक पोजीशन के लिए तय की जाती है।

अगर आपने किसी ट्रेड के लिए ₹10,000 आइसोलेटेड मार्जिन रखा है, तो वह पोजीशन आमतौर पर उसी मार्जिन के आधार पर संभाली जाएगी।

वॉलेट का बाकी उपलब्ध बैलेंस उसे अपने आप सहारा नहीं देगा।

इससे ट्रेडर पहले ही तय कर सकता है कि किसी एक पोजीशन में कितना पैसा जोखिम में रखना है।

हालांकि, आइसोलेटेड मार्जिन लिक्विडेशन को नहीं रोकता। अगर बाजार पोजीशन के विपरीत जाता है और तय मार्जिन जरूरी मेंटेनेंस स्तर तक गिर जाता है, तो पोजीशन लिक्विडेट हो सकती है।

क्रॉस मार्जिन और आइसोलेटेड मार्जिन में अंतर

फीचरक्रॉस मार्जिनआइसोलेटेड मार्जिन
जमानतउपलब्ध वॉलेट बैलेंस साझा होता हैकेवल तय मार्जिन इस्तेमाल होता है
एक ट्रेड का जोखिमवॉलेट के बड़े हिस्से तक पहुंच सकता हैतय मार्जिन तक सीमित रहता है
लिक्विडेशन बचावज्यादा हो सकता हैआमतौर पर कम होता है
दूसरी पोजीशन पर असरहो सकता हैआमतौर पर अलग रहता है
जोखिम नियंत्रणअकाउंट के स्तर परपोजीशन के स्तर पर
उपयोगअनुभवी और कई पोजीशन रखने वाले ट्रेडरहर ट्रेड का जोखिम सीमित रखने वाले ट्रेडर

क्रॉस मार्जिन को सीधे सुरक्षित नहीं माना जा सकता। यह किसी एक पोजीशन को ज्यादा बचाव दे सकता है, लेकिन पूरे फ्यूचर्स वॉलेट का जोखिम बढ़ा सकता है।

आइसोलेटेड मार्जिन में नुकसान को पोजीशन के स्तर पर सीमित रखना आसान होता है। फिर भी स्टॉप लॉस और सही पोजीशन आकार जरूरी हैं।

मार्जिन कॉल क्या होता है?

मार्जिन कॉल एक चेतावनी या सूचना हो सकती है कि अकाउंट या पोजीशन की इक्विटी जरूरी मेंटेनेंस मार्जिन के करीब पहुंच रही है।

पारंपरिक वित्तीय बाजार में ब्रोकर ट्रेडर से अतिरिक्त मार्जिन जोड़ने के लिए कह सकता है। लेकिन क्रिप्टो फ्यूचर्स में स्वचालित लिक्विडेशन सिस्टम बहुत तेजी से काम करते हैं।

इसलिए यह मानना सही नहीं है कि लिक्विडेशन से पहले आपको हमेशा मार्जिन कॉल, ईमेल या सूचना जरूर मिलेगी।

तेजी से बदलते बाजार में पोजीशन चेतावनी मिलने से पहले भी लिक्विडेशन स्तर तक पहुंच सकती है।

जोखिम प्रबंधन के लिए प्लेटफॉर्म की चेतावनी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

लिक्विडेशन क्या होती है?

लिक्विडेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें एक्सचेंज किसी लेवरेज्ड पोजीशन को अपने आप बंद कर देता है।

यह आमतौर पर तब होती है, जब पोजीशन की इक्विटी जरूरी मेंटेनेंस मार्जिन तक गिर जाती है।

लिक्विडेशन का उद्देश्य पोजीशन को ऐसा नुकसान करने से रोकना है, जिसे उपलब्ध जमानत सहारा नहीं दे सकती।

लिक्विडेशन प्राइस इन बातों पर निर्भर कर सकती है:

  • एंट्री प्राइस
  • पोजीशन का आकार
  • लेवरेज
  • शुरुआती मार्जिन
  • मेंटेनेंस मार्जिन
  • क्रॉस या आइसोलेटेड मार्जिन
  • उपलब्ध वॉलेट बैलेंस
  • फंडिंग और ट्रेडिंग फीस
  • मार्क प्राइस

इसलिए केवल लेवरेज देखकर लिक्विडेशन प्राइस का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

मार्जिन कॉल और लिक्विडेशन में क्या अंतर है?

फीचरक्रॉस मार्जिनआइसोलेटेड मार्जिन
जमानतउपलब्ध वॉलेट बैलेंस साझा होता हैकेवल तय मार्जिन इस्तेमाल होता है
एक ट्रेड का जोखिमवॉलेट के बड़े हिस्से तक पहुंच सकता हैतय मार्जिन तक सीमित रहता है
लिक्विडेशन बचावज्यादा हो सकता हैआमतौर पर कम होता है
दूसरी पोजीशन पर असरहो सकता हैआमतौर पर अलग रहता है
जोखिम नियंत्रणअकाउंट के स्तर परपोजीशन के स्तर पर

क्रिप्टो फ्यूचर्स में मार्जिन कॉल की तुलना में प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई लिक्विडेशन प्राइस और मार्जिन अनुपात पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मार्क प्राइस का मार्जिन से क्या संबंध है?

क्रिप्टो फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म अक्सर लिक्विडेशन के लिए आखिरी ट्रेड कीमत के बजाय मार्क प्राइस का इस्तेमाल करते हैं।

आखिरी ट्रेड कीमत वह कीमत है, जिस पर सबसे हाल का ट्रेड पूरा हुआ। मार्क प्राइस कई बाजार कीमतों के आधार पर निकाली गई अनुमानित उचित कीमत होती है।

मार्क प्राइस का इस्तेमाल अचानक कीमत बढ़ने या घटने अथवा किसी एक असामान्य ट्रेड के कारण अनावश्यक लिक्विडेशन की संभावना कम करने के लिए किया जाता है।

WazirX के फ्यूचर्स शिक्षा सामग्री के अनुसार लिक्विडेशन मार्क प्राइस से जुड़ी होती है, केवल आखिरी ट्रेड कीमत से नहीं।

मार्जिन को बेहतर तरीके से कैसे संभालें?

कम लेवरेज चुनें

कम लेवरेज से आमतौर पर लिक्विडेशन प्राइस एंट्री प्राइस से दूर रहती है।

इससे पोजीशन को सामान्य बाजार उतार चढ़ाव सहने के लिए ज्यादा बचाव मिल सकता है।

पोजीशन का आकार सीमित रखें

केवल यह न देखें कि प्लेटफॉर्म कितनी बड़ी पोजीशन खोलने देता है।

यह पहले तय करें कि ट्रेड गलत होने पर आप कितना नुकसान स्वीकार कर सकते हैं।

स्टॉप लॉस पहले तय करें

स्टॉप लॉस पोजीशन को लिक्विडेशन से पहले बंद करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, तेज बाजार या कम लिक्विडिटी में ऑर्डर तय कीमत से अलग स्तर पर पूरा हो सकता है। इसलिए स्टॉप लॉस नुकसान रोकने की गारंटी नहीं देता।

WazirX फ्यूचर्स पर टेक प्रॉफिट और स्टॉप लॉस ऐप तथा वेब पर उपलब्ध हैं।

लिक्विडेशन प्राइस जांचें

ऑर्डर की पुष्टि करने से पहले एंट्री प्राइस, मार्क प्राइस और लिक्विडेशन प्राइस देखें।

अगर लिक्विडेशन प्राइस बहुत करीब है, तो लेवरेज कम करने या पोजीशन का आकार घटाने पर विचार किया जा सकता है।

क्रॉस मार्जिन सावधानी से इस्तेमाल करें

क्रॉस मार्जिन किसी पोजीशन को अतिरिक्त बचाव दे सकता है।

लेकिन इससे पूरा उपलब्ध फ्यूचर्स वॉलेट जोखिम में आ सकता है।

फ्यूचर्स वॉलेट में अतिरिक्त रकम न छोड़ें

क्रॉस मार्जिन इस्तेमाल करते समय वॉलेट में रखा अतिरिक्त बैलेंस भी जमानत बन सकता है।

इसलिए केवल उतनी पूंजी रखें, जितनी आपकी कुल जोखिम योजना में शामिल है।

फंडिंग और फीस को शामिल करें

परपेचुअल फ्यूचर्स में फंडिंग भुगतान तथा ट्रेडिंग फीस पोजीशन की इक्विटी और वास्तविक मुनाफे या नुकसान को प्रभावित कर सकते हैं।

जुलाई 2026 तक WazirX फ्यूचर्स की घोषित मेकर फीस 0.02% और टेकर फीस 0.04% है।

फीस बदल सकती है, इसलिए ट्रेड से पहले मौजूदा फीस जरूर जांचें।

WazirX फ्यूचर्स में मार्जिन से जुड़ी मौजूदा जानकारी

जुलाई 2026 तक WazirX फ्यूचर्स से जुड़ी मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

फीचरमौजूदा जानकारी
सेटलमेंटरुपये में सेटल होने वाले परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट
उपलब्ध प्लेटफॉर्मWazirX ऐप और वेब
लेवरेजपात्र मार्केट में 100 गुना तक
मेकर फीस0.02%
टेकर फीस0.04%
जोखिम उपकरणटेक प्रॉफिट और स्टॉप लॉस
वॉलेटस्पॉट और फ्यूचर्स वॉलेट के बीच ट्रांसफर
पहुंचफ्यूचर्स शुरू करने से पहले जानकारी परीक्षा

WazirX ने फ्यूचर्स को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया है।

उपलब्ध मार्केट, लेवरेज सीमा और प्रोडक्ट फीचर समय के साथ बदल सकते हैं। ट्रेड से पहले कॉन्ट्रैक्ट स्क्रीन पर दिखाई गई मौजूदा जानकारी जांचनी चाहिए।

अंतिम विचार

मार्जिन क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग का मुख्य आधार है। यह कम पूंजी के साथ बड़ी पोजीशन खोलने की सुविधा देता है, लेकिन इसी कारण नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है।

शुरुआती मार्जिन पोजीशन खोलने के लिए जरूरी होती है, जबकि मेंटेनेंस मार्जिन उसे खुला रखने का न्यूनतम स्तर तय करती है। ज्यादा लेवरेज इन दोनों के बीच के बचाव को कम कर सकता है।

किसी भी ट्रेड से पहले पोजीशन का आकार, लेवरेज, मार्जिन का प्रकार, मार्क प्राइस और लिक्विडेशन प्राइस जांचें।

प्लेटफॉर्म की चेतावनी पर निर्भर रहने के बजाय पहले से स्टॉप लॉस और अधिकतम जोखिम तय करें।

फ्यूचर्स में सही दिशा चुनने जितना ही जरूरी पूंजी को सुरक्षित तरीके से संभालना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्रिप्टो फ्यूचर्स में मार्जिन क्या है?

मार्जिन वह जमानत है, जिसे फ्यूचर्स पोजीशन खोलने और बनाए रखने के लिए जमा किया जाता है।

यह पूरी पोजीशन की कीमत का एक हिस्सा होता है। लेवरेज की मदद से इस मार्जिन से बड़ी बाजार पोजीशन ली जा सकती है।

फ्यूचर्स में 10 गुना मार्जिन का क्या मतलब है?

आमतौर पर इसका मतलब 10 गुना लेवरेज होता है।

₹10,000 मार्जिन से लगभग ₹1,00,000 की पोजीशन खोली जा सकती है। मुनाफा और नुकसान पूरी ₹1,00,000 की पोजीशन पर बदलेंगे।

शुरुआती मार्जिन और मेंटेनेंस मार्जिन में क्या अंतर है?

शुरुआती मार्जिन पोजीशन खोलने के लिए जरूरी रकम है।

मेंटेनेंस मार्जिन वह न्यूनतम इक्विटी है, जिसे पोजीशन खुली रखने के लिए बनाए रखना होता है। इक्विटी इस स्तर तक गिरने पर लिक्विडेशन हो सकती है।

क्या मार्जिन उधार लिया हुआ पैसा होता है?

मार्जिन ट्रेडर की जमानत होती है। लेवरेज पोजीशन की बाजार में कुल कीमत बढ़ाता है।

फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडर जरूरी नहीं कि पारंपरिक कर्ज की तरह कोई क्रिप्टो उधार ले रहा हो।

क्रॉस मार्जिन या आइसोलेटेड मार्जिन में से कौन बेहतर है?

यह ट्रेडिंग रणनीति और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है।

आइसोलेटेड मार्जिन में हर ट्रेड का जोखिम सीमित करना आसान होता है। क्रॉस मार्जिन ज्यादा लचीलापन देता है, लेकिन उपलब्ध फ्यूचर्स वॉलेट बैलेंस के बड़े हिस्से को जोखिम में डाल सकता है।

क्या लिक्विडेशन से पहले मार्जिन कॉल हमेशा आती है?

नहीं। क्रिप्टो फ्यूचर्स में चेतावनी या सूचना मिलने की गारंटी नहीं होती।

तेज बाजार बदलाव के दौरान पोजीशन सीधे लिक्विडेशन स्तर तक पहुंच सकती है।

मार्जिन स्तर 1000% होने का क्या मतलब है?

मार्जिन स्तर की गणना हर प्लेटफॉर्म पर एक जैसी नहीं होती।

इसलिए केवल 1000% देखकर पोजीशन को सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। प्लेटफॉर्म की मार्जिन अनुपात गणना, मेंटेनेंस मार्जिन और लिक्विडेशन प्राइस भी जांचना जरूरी है।

क्या ज्यादा मार्जिन जोड़ने से लिक्विडेशन रुक सकती है?

अतिरिक्त मार्जिन लिक्विडेशन प्राइस को दूर कर सकती है, लेकिन नुकसान की संभावना खत्म नहीं करती।

अगर बाजार लगातार विपरीत दिशा में जाता है, तो जोड़ी गई रकम भी खो सकती है। अतिरिक्त मार्जिन जोड़ने से पहले यह जांचें कि ट्रेड का कारण अभी भी सही है या नहीं।

अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

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