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क्रिप्टो स्पॉट और क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग: क्या अंतर है? (Crypto Spot vs Crypto Futures Trading: Key Differences Explained)

By जुलाई 28, 2026अनुमानित पढ़ने का समय: 13 मिनट
क्रिप्टो स्पॉट और क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग: क्या अंतर है?

Table of Contents

क्रिप्टो स्पॉट और क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग बाजार में भाग लेने के 2 अलग तरीके हैं। स्पॉट ट्रेडिंग में आप मौजूदा बाजार कीमत पर वास्तविक क्रिप्टो खरीदते हैं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आप क्रिप्टो की कीमत को ट्रैक करने वाला एक अनुबंध ट्रेड करते हैं।

दोनों में मुनाफा कमाने का तरीका, जोखिम और शुल्क अलग होते हैं। स्पॉट ट्रेडिंग तुलनात्मक रूप से सरल होती है। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में लीवरेज, मार्जिन, शॉर्ट पोज़िशन और लिक्विडेशन जैसे अतिरिक्त पहलू शामिल होते हैं।

संक्षेप में

  • स्पॉट ट्रेडिंग में खरीदा गया वास्तविक क्रिप्टो आपके वॉलेट में आता है।
  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आप वास्तविक कॉइन नहीं, बल्कि उसकी कीमत से जुड़ा अनुबंध ट्रेड करते हैं।
  • स्पॉट ट्रेडिंग में सामान्यतः लीवरेज या लिक्विडेशन का जोखिम नहीं होता।
  • फ्यूचर्स में लीवरेज संभावित मुनाफे और नुकसान, दोनों को बढ़ा सकता है।
  • फ्यूचर्स ट्रेडर्स कीमत बढ़ने पर लॉन्ग और गिरने पर शॉर्ट पोज़िशन ले सकते हैं।
  • नए उपयोगकर्ताओं के लिए स्पॉट ट्रेडिंग बाजार को समझने का आसान शुरुआती तरीका हो सकती है।
  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग सक्रिय निगरानी और मजबूत जोखिम प्रबंधन की मांग करती है।

क्रिप्टो स्पॉट और फ्यूचर्स में मुख्य अंतर क्या है?

स्पॉट ट्रेडिंग में आप वास्तविक क्रिप्टो खरीदते हैं, जबकि फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आप उसकी कीमत से जुड़ा अनुबंध खरीदते या बेचते हैं।

स्पॉट में खरीदा गया बिटकॉइन, एथेरियम या कोई अन्य क्रिप्टो सीधे आपके एक्सचेंज वॉलेट में दिखाई देता है। आप उसे होल्ड, बेच या उपलब्ध सुविधा के अनुसार दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर कर सकते हैं।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में वास्तविक क्रिप्टो आपके वॉलेट में नहीं आता। आपका मुनाफा या नुकसान अनुबंध की एंट्री और एग्ज़िट कीमत के अंतर पर निर्भर करता है। 

क्रिप्टो स्पॉट ट्रेडिंग क्या है?

स्पॉट ट्रेडिंग में किसी क्रिप्टो को उसकी मौजूदा बाजार कीमत पर खरीदा या बेचा जाता है।

मान लीजिए प्रिया ₹10,000 का बिटकॉइन खरीदती है। खरीद पूरी होने के बाद बिटकॉइन उसके एक्सचेंज वॉलेट में आ जाता है। अब वह उस संपत्ति की मालिक है।

स्पॉट ट्रेडिंग में सामान्यतः:

  • वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व मिलता है।
  • कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं होती।
  • लीवरेज का इस्तेमाल नहीं होता।
  • लिक्विडेशन का जोखिम नहीं होता।
  • कीमत बढ़ने पर मुनाफा कमाया जा सकता है।

अगर प्रिया ₹10,000 का बिटकॉइन खरीदती है और उसकी कीमत 50% गिर जाती है, तो उसकी होल्डिंग का मूल्य लगभग ₹5,000 रह जाएगा। वह अभी भी बिटकॉइन की मालिक रहेगी और एक्सचेंज उसकी पोज़िशन को अपने आप बंद नहीं करेगा।

क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है?

क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में ट्रेडर वास्तविक कॉइन खरीदे बिना उसकी कीमत में होने वाले बदलाव पर पोज़िशन लेता है।

फ्यूचर्स अनुबंध किसी क्रिप्टो की कीमत को ट्रैक करता है। ट्रेडर कीमत बढ़ने की उम्मीद में लॉन्ग और गिरने की उम्मीद में शॉर्ट पोज़िशन खोल सकता है।

परंपरागत फ्यूचर्स अनुबंध की एक निश्चित समाप्ति तिथि हो सकती है। परपेचुअल फ्यूचर्स की कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं होती। पोज़िशन तब तक खुली रह सकती है, जब तक ट्रेडर उसे बंद नहीं करता या वह लिक्विडेट नहीं होती।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग की प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व नहीं मिलता।
  • लीवरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • लॉन्ग और शॉर्ट, दोनों पोज़िशन उपलब्ध होती हैं।
  • मार्जिन बनाए रखना जरूरी होता है।
  • पोज़िशन लिक्विडेट हो सकती है।
  • परपेचुअल अनुबंधों पर फंडिंग भुगतान लागू हो सकता है।

स्पॉट बनाम फ्यूचर्स: आसान तुलना

आधारस्पॉट ट्रेडिंगफ्यूचर्स ट्रेडिंग
क्रिप्टो का स्वामित्वहां, वास्तविक क्रिप्टो मिलता हैनहीं, कीमत से जुड़ा अनुबंध मिलता है
लीवरेजसामान्यतः नहींउपलब्ध हो सकता है
लिक्विडेशननहींहो सकता है
शॉर्ट पोज़िशनसामान्यतः उपलब्ध नहींउपलब्ध होती है
समाप्ति तिथिनहींनिश्चित या परपेचुअल अनुबंध
फंडिंग भुगताननहींपरपेचुअल फ्यूचर्स में हो सकता है
जटिलताकमअधिक
जोखिमनिवेश की गई राशि तक सीमितलीवरेज के कारण अधिक
उपयोगलंबी अवधि की होल्डिंगसक्रिय ट्रेडिंग और हेजिंग
निगरानीतुलनात्मक रूप से कमनियमित निगरानी जरूरी

क्रिप्टो के स्वामित्व में क्या अंतर है?

स्पॉट ट्रेडिंग में ट्रेडर वास्तविक क्रिप्टो खरीदता है। अगर आपने 0.1 एथेरियम खरीदा है, तो वह एथेरियम आपके खाते में दिखाई देगा।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आपको वास्तविक बिटकॉइन या एथेरियम नहीं मिलता। आप केवल एक ऐसे अनुबंध को ट्रेड करते हैं, जिसका मूल्य संबंधित क्रिप्टो की कीमत के अनुसार बदलता है।

यही कारण है कि फ्यूचर्स पोज़िशन को किसी निजी क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

स्पॉट और फ्यूचर्स में मुनाफा कैसे होता है?

स्पॉट ट्रेडिंग में मुनाफा

स्पॉट ट्रेडर आमतौर पर कम कीमत पर क्रिप्टो खरीदता है और कीमत बढ़ने पर उसे बेचता है।

उदाहरण:

  • खरीद मूल्य: ₹10,000
  • कीमत में बढ़ोतरी: 20%
  • नई कीमत: ₹12,000
  • अनुमानित मुनाफा: ₹2,000

अगर कीमत गिरती है, तो होल्डिंग का बाजार मूल्य कम होता है। हालांकि, जब तक ट्रेडर बेचता नहीं है, तब तक नुकसान बुक नहीं होता।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मुनाफा

फ्यूचर्स ट्रेडर बढ़ते और गिरते, दोनों बाजारों में पोज़िशन ले सकता है।

  • कीमत बढ़ने की उम्मीद हो तो लॉन्ग पोज़िशन।
  • कीमत गिरने की उम्मीद हो तो शॉर्ट पोज़िशन।

अगर बाजार चुनी गई दिशा में जाता है, तो मुनाफा हो सकता है। अगर बाजार विपरीत दिशा में जाता है, तो नुकसान हो सकता है।

लीवरेज स्पॉट और फ्यूचर्स को कैसे अलग बनाता है?

लीवरेज फ्यूचर्स ट्रेडिंग का सबसे महत्वपूर्ण और जोखिमपूर्ण हिस्सा है।

लीवरेज ट्रेडर को सीमित मार्जिन के साथ बड़ी पोज़िशन खोलने की सुविधा देता है।

मान लीजिए:

  • उपलब्ध मार्जिन: ₹10,000
  • लीवरेज: 10 गुना
  • कुल पोज़िशन: ₹1,00,000

अगर कीमत 5% ट्रेडर के पक्ष में जाती है, तो लगभग ₹5,000 का कुल मुनाफा हो सकता है। यह ₹10,000 के मार्जिन पर 50% के बराबर है।

अगर कीमत 5% विपरीत दिशा में जाती है, तो लगभग ₹5,000 का नुकसान हो सकता है। यानी शुरुआती मार्जिन का लगभग आधा हिस्सा कम हो सकता है।

इस उदाहरण में ट्रेडिंग शुल्क, फंडिंग भुगतान, स्लिपेज और रखरखाव मार्जिन शामिल नहीं हैं।

समान कीमत बदलाव का स्पॉट और फ्यूचर्स पर प्रभाव

मान लीजिए प्रिया ₹50,000 के मूल्य का बिटकॉइन खरीदना चाहती है।

स्पॉट ट्रेडिंग

प्रिया ₹50,000 का वास्तविक बिटकॉइन खरीदती है। अगर बिटकॉइन की कीमत 10% गिरती है, तो उसकी होल्डिंग का मूल्य लगभग ₹45,000 रह जाएगा।

  • निवेश: ₹50,000
  • गिरावट: 10%
  • नुकसान: ₹5,000
  • बची हुई होल्डिंग: ₹45,000

प्रिया अभी भी बिटकॉइन की मालिक है।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग

प्रिया ₹5,000 मार्जिन और 10 गुना लीवरेज से ₹50,000 की लॉन्ग पोज़िशन खोलती है।

अगर बिटकॉइन की कीमत 10% गिरती है, तो ₹50,000 की पोज़िशन पर लगभग ₹5,000 का नुकसान हो सकता है। इससे उसका पूरा शुरुआती मार्जिन प्रभावित हो सकता है और पोज़िशन पहले ही लिक्विडेट हो सकती है।

यह उदाहरण बताता है कि समान कीमत गिरावट स्पॉट और लीवरेज फ्यूचर्स में अलग प्रभाव डालती है।

फ्यूचर्स में मार्जिन क्या है?

मार्जिन वह सुरक्षा राशि है, जिसे फ्यूचर्स पोज़िशन खोलने और चालू रखने के लिए जमा किया जाता है।

मार्जिन मुख्य रूप से 2 प्रकार का होता है:

शुरुआती मार्जिन

शुरुआती मार्जिन नई पोज़िशन खोलने के लिए जरूरी न्यूनतम राशि है।

उदाहरण के लिए, ₹1,00,000 की पोज़िशन को 10 गुना लीवरेज पर खोलने के लिए लगभग ₹10,000 का शुरुआती मार्जिन जरूरी हो सकता है।

रखरखाव मार्जिन

रखरखाव मार्जिन वह न्यूनतम रकम है, जिसे पोज़िशन चालू रखने के लिए बनाए रखना जरूरी होता है।

अगर नुकसान के कारण उपलब्ध मार्जिन इस सीमा से नीचे चला जाता है, तो पोज़िशन लिक्विडेट हो सकती है।

लिक्विडेशन क्या है?

लिक्विडेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें एक्सचेंज मार्जिन कम होने पर फ्यूचर्स पोज़िशन को अपने आप बंद कर देता है।

यह केवल फ्यूचर्स या लीवरेज वाली ट्रेडिंग में होता है। सामान्य स्पॉट पोज़िशन में लिक्विडेशन नहीं होता।

लिक्विडेशन से जुड़ी प्रमुख बातें:

  • अधिक लीवरेज में लिक्विडेशन प्राइस एंट्री प्राइस के करीब होता है।
  • कीमत तेजी से बदलने पर पोज़िशन कुछ ही समय में लिक्विडेट हो सकती है।
  • कुछ मंच पूर्ण लिक्विडेशन से पहले पोज़िशन का हिस्सा बंद कर सकते हैं।
  • तेज बाजार में कई लिक्विडेशन एक साथ होने से कीमत में बड़ा बदलाव आ सकता है।
  • स्टॉप लॉस लिक्विडेशन से पहले पोज़िशन बंद करने में मदद कर सकता है।

स्पॉट ट्रेडिंग में कीमत गिरने पर होल्डिंग का मूल्य कम होता है, लेकिन एक्सचेंज केवल बाजार गिरने के कारण उसे अपने आप नहीं बेचता।

फंडिंग दर क्या है? 

फंडिंग दर परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होने वाला समय-समय का भुगतान है।

इसका उद्देश्य फ्यूचर्स अनुबंध की कीमत को स्पॉट बाजार की कीमत के करीब रखना होता है।

  • फंडिंग दर सकारात्मक होने पर सामान्यतः लॉन्ग ट्रेडर्स शॉर्ट ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।
  • फंडिंग दर नकारात्मक होने पर सामान्यतः शॉर्ट ट्रेडर्स लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं।

फंडिंग भुगतान की अवधि और दर मंच तथा अनुबंध के अनुसार अलग हो सकती है। पोज़िशन लंबे समय तक खुली रखने पर फंडिंग का खर्च कुल मुनाफे को कम कर सकता है।

स्पॉट ट्रेडर्स को फंडिंग भुगतान नहीं करना पड़ता।

फ्यूचर्स में शॉर्ट पोज़िशन कैसे काम करती है?

स्पॉट ट्रेडिंग में सामान्यतः ट्रेडर पहले क्रिप्टो खरीदता है और कीमत बढ़ने पर बेचता है। कीमत गिरने से सीधे मुनाफा कमाने की सुविधा सामान्य स्पॉट बाजार में उपलब्ध नहीं होती।

फ्यूचर्स में ट्रेडर शॉर्ट पोज़िशन खोल सकता है। इसका अर्थ है कि वह कीमत गिरने की उम्मीद के आधार पर ट्रेड कर रहा है।

उदाहरण:

  • शॉर्ट एंट्री: ₹1,00,000
  • एग्ज़िट कीमत: ₹90,000
  • कीमत में गिरावट: 10%

अगर कीमत गिरती है, तो शॉर्ट पोज़िशन में मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत बढ़ती है, तो नुकसान हो सकता है।

अधिक लीवरेज के साथ शॉर्ट पोज़िशन में अचानक कीमत बढ़ने पर तेजी से नुकसान हो सकता है। इसे शॉर्ट स्क्वीज जैसी स्थिति और गंभीर बना सकती है।

फ्यूचर्स का इस्तेमाल हेजिंग में कैसे होता है?

हेजिंग का अर्थ मौजूदा निवेश पर संभावित नुकसान को दूसरी पोज़िशन से सीमित करना है।

मान लीजिए किसी ट्रेडर के पास स्पॉट बाजार में बिटकॉइन है। उसे लगता है कि छोटी अवधि में कीमत गिर सकती है, लेकिन वह अपनी बिटकॉइन होल्डिंग बेचना नहीं चाहता।

वह सीमित आकार की शॉर्ट बिटकॉइन फ्यूचर्स पोज़िशन खोल सकता है। अगर बिटकॉइन की कीमत गिरती है, तो स्पॉट होल्डिंग में हुआ कुछ नुकसान शॉर्ट फ्यूचर्स पोज़िशन के मुनाफे से संतुलित हो सकता है।

हालांकि, हेजिंग जोखिम को पूरी तरह समाप्त नहीं करती। गलत पोज़िशन आकार, लीवरेज, फंडिंग भुगतान और कीमत में अचानक बदलाव अतिरिक्त नुकसान पैदा कर सकते हैं।

स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग की फीस में अंतर

दोनों बाजारों में शुल्क की संरचना अलग हो सकती है।

स्पॉट ट्रेडिंग शुल्क

स्पॉट में खरीद और बिक्री के प्रत्येक ऑर्डर पर मेकर या टेकर शुल्क लग सकता है।

लंबी अवधि तक क्रिप्टो होल्ड करने के लिए कोई फंडिंग शुल्क नहीं होता।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुल्क

फ्यूचर्स में पोज़िशन खोलने और बंद करने पर मेकर या टेकर शुल्क लग सकता है।

परपेचुअल फ्यूचर्स में समय-समय पर फंडिंग भुगतान भी लागू हो सकता है। लीवरेज के कारण कुल पोज़िशन बड़ी होती है, इसलिए शुल्क का प्रभाव शुरुआती मार्जिन की तुलना में अधिक महसूस हो सकता है।

इनमें से कोई एक विकल्प हर स्थिति में सस्ता नहीं होता। कुल खर्च इन बातों पर निर्भर करता है:

  • पोज़िशन कितने समय तक खुली रहती है।
  • कितनी बार ट्रेड किया जाता है।
  • कितने लीवरेज का इस्तेमाल किया जाता है।
  • फंडिंग दर क्या है।
  • ऑर्डर मेकर है या टेकर।

स्पॉट ट्रेडिंग के फायदे

वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व: स्पॉट में खरीदा गया क्रिप्टो आपके एक्सचेंज वॉलेट में आता है।

लिक्विडेशन का जोखिम नहीं: बाजार गिरने पर होल्डिंग का मूल्य कम हो सकता है, लेकिन पोज़िशन अपने आप बंद नहीं होती।

तुलनात्मक रूप से सरल: स्पॉट ट्रेडिंग को समझना फ्यूचर्स की तुलना में आसान हो सकता है।

लंबी अवधि की होल्डिंग: स्पॉट बाजार उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो क्रिप्टो को लंबी अवधि तक होल्ड करना चाहते हैं।

लीवरेज से होने वाला अतिरिक्त जोखिम नहीं: सामान्य स्पॉट ट्रेडिंग में उधार पूंजी या लीवरेज का इस्तेमाल नहीं होता।

स्पॉट ट्रेडिंग की सीमाएं

कीमत गिरने पर सीधे मुनाफा नहीं: सामान्य स्पॉट ट्रेडिंग में कीमत गिरने से मुनाफा कमाने के लिए शॉर्ट पोज़िशन उपलब्ध नहीं होती।

पूरी रकम लगानी पड़ती है: ₹50,000 का क्रिप्टो खरीदने के लिए सामान्यतः पूरी ₹50,000 राशि की जरूरत होती है।

पूंजी लंबे समय तक फंस सकती है: लंबी अवधि की होल्डिंग में पूंजी लंबे समय तक एक ही संपत्ति में लगी रह सकती है।

बाजार गिरने पर होल्डिंग का मूल्य कम होता है: लिक्विडेशन नहीं होता, लेकिन क्रिप्टो की कीमत काफी गिरने पर निवेश का बाजार मूल्य भी कम हो सकता है।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग के फायदे

बढ़ते और गिरते बाजार में ट्रेड: लॉन्ग और शॉर्ट पोज़िशन की मदद से दोनों दिशाओं में ट्रेड किया जा सकता है।

लीवरेज की सुविधा: कम मार्जिन के साथ बड़ी पोज़िशन खोली जा सकती है।

हेजिंग: मौजूदा स्पॉट पोर्टफोलियो पर छोटी अवधि के जोखिम को सीमित करने के लिए फ्यूचर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूंजी का प्रभावी इस्तेमाल: ट्रेडर पूरी पोज़िशन की रकम जमा किए बिना बाजार में बड़ा जोखिम ले सकता है।

हालांकि, ये फायदे अधिक जोखिम और जटिलता के साथ आते हैं।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग के जोखिम

लिक्विडेशन: मार्जिन तय सीमा से नीचे जाने पर पोज़िशन अपने आप बंद हो सकती है।

लीवरेज से बढ़ता नुकसान: कीमत में छोटा बदलाव भी मार्जिन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

फंडिंग का खर्च: परपेचुअल पोज़िशन को लंबे समय तक खुला रखने पर फंडिंग भुगतान लागू हो सकता है।

अधिक जटिलता: ट्रेडर को मार्जिन, लीवरेज, मार्क प्राइस, लिक्विडेशन और फंडिंग समझनी पड़ती है।

सक्रिय निगरानी: फ्यूचर्स पोज़िशन को नियमित रूप से देखना जरूरी हो सकता है।

भावनात्मक ट्रेडिंग: लीवरेज वाली पोज़िशन में तेजी से बदलता मुनाफा और नुकसान जल्दबाजी में फैसले लेने का कारण बन सकता है।

स्पॉट और फ्यूचर्स में स्टॉप लॉस का क्या महत्व है?

स्टॉप लॉस एक ऐसा ऑर्डर है, जो कीमत के पहले से तय स्तर पर पहुंचने पर पोज़िशन बंद करने में मदद करता है।

स्पॉट ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस कीमत गिरने पर नुकसान सीमित करने में मदद कर सकता है।

फ्यूचर्स में स्टॉप लॉस और भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि लीवरेज के कारण लिक्विडेशन प्राइस जल्दी आ सकता है। स्टॉप लॉस को सामान्यतः लिक्विडेशन स्तर से पहले रखा जाना चाहिए।

हालांकि, तेज उतार-चढ़ाव या कम तरलता के दौरान स्टॉप लॉस तय कीमत से अलग स्तर पर पूरा हो सकता है।

स्पॉट ट्रेडिंग किसके लिए सही हो सकती है?

स्पॉट ट्रेडिंग उन उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकती है, जो:

  • क्रिप्टो बाजार में नए हैं।
  • वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व चाहते हैं।
  • लंबी अवधि का पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं।
  • लीवरेज और लिक्विडेशन से बचना चाहते हैं।
  • सीमित और आसानी से समझ आने वाला जोखिम चाहते हैं।
  • अपनी पोज़िशन को लगातार नहीं देखना चाहते।

स्पॉट ट्रेडिंग में भी कीमत गिरने और पूंजी खोने का जोखिम रहता है। इसे जोखिम-मुक्त नहीं समझना चाहिए।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग किसके लिए सही हो सकती है?

फ्यूचर्स ट्रेडिंग उन सक्रिय ट्रेडर्स के लिए उपयोगी हो सकती है, जो:

  • लीवरेज और मार्जिन को अच्छी तरह समझते हैं।
  • लिक्विडेशन प्राइस की गणना समझते हैं।
  • लॉन्ग और शॉर्ट, दोनों रणनीतियों का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
  • अपनी पोज़िशन नियमित रूप से देख सकते हैं।
  • स्टॉप लॉस और पोज़िशन आकार का अनुशासित इस्तेमाल करते हैं।
  • मौजूदा स्पॉट पोर्टफोलियो को हेज करना चाहते हैं।
  • अधिक जोखिम और जटिलता को स्वीकार कर सकते हैं।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग केवल अधिक मुनाफे का साधन नहीं है। गलत लीवरेज या जोखिम प्रबंधन बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।

स्पॉट या फ्यूचर्स: किसे चुनना चाहिए?

स्पॉट ट्रेडिंग चुनने पर विचार करें अगरफ्यूचर्स ट्रेडिंग पर विचार करें अगर
आप क्रिप्टो में नए हैंआप लीवरेज और मार्जिन समझते हैं
आप वास्तविक क्रिप्टो खरीदना चाहते हैंआप कीमत बढ़ने और गिरने, दोनों पर ट्रेड करना चाहते हैं
आप लंबी अवधि के लिए होल्ड करना चाहते हैंआप सक्रिय रूप से पोज़िशन की निगरानी कर सकते हैं
आप लिक्विडेशन जोखिम नहीं चाहतेआप लिक्विडेशन के जोखिम को समझते हैं
आप सरल ट्रेडिंग अनुभव चाहते हैंआप हेजिंग करना चाहते हैं
आप सीमित जोखिम पसंद करते हैंआप अधिक जटिलता और जोखिम स्वीकार करते हैं

कई अनुभवी ट्रेडर्स पहले स्पॉट बाजार से शुरुआत करते हैं। बाजार की चाल, ऑर्डर और जोखिम को समझने के बाद वे छोटी फ्यूचर्स पोज़िशन पर विचार करते हैं।

सीधे अधिक लीवरेज वाले फ्यूचर्स में शुरुआत करना नए ट्रेडर्स के लिए महंगा अनुभव साबित हो सकता है।

शुरुआती ट्रेडर किन गलतियों से बचें?

  • पूरी पूंजी एक ही ट्रेड में न लगाएं।
  • अधिक लीवरेज से शुरुआत न करें।
  • बिना स्टॉप लॉस के फ्यूचर्स पोज़िशन न खोलें।
  • लिक्विडेशन प्राइस देखे बिना ऑर्डर पूरा न करें।
  • फंडिंग दर और ट्रेडिंग शुल्क को नजरअंदाज न करें।
  • नुकसान वाली पोज़िशन में बिना योजना के मार्जिन न जोड़ें।
  • केवल सोशल मीडिया की सलाह पर ट्रेड न करें।
  • नुकसान के बाद तुरंत बड़ी पोज़िशन खोलकर रकम वापस पाने की कोशिश न करें।
  • स्पॉट और फ्यूचर्स के जोखिम को एक जैसा न समझें।

अंतिम विचार

क्रिप्टो स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच चुनाव आपकी रणनीति, अनुभव और जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर करता है।

स्पॉट ट्रेडिंग में वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व मिलता है और लिक्विडेशन का जोखिम नहीं होता। इसलिए यह नए उपयोगकर्ताओं और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सरल विकल्प हो सकता है।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग लॉन्ग, शॉर्ट, लीवरेज और हेजिंग जैसी सुविधाएं देती है। लेकिन इसमें लिक्विडेशन, फंडिंग और बढ़े हुए नुकसान का जोखिम होता है। फ्यूचर्स शुरू करने से पहले मार्जिन, लीवरेज, पोज़िशन आकार और स्टॉप लॉस को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग में मुख्य अंतर क्या है?

स्पॉट ट्रेडिंग में आप मौजूदा बाजार कीमत पर वास्तविक क्रिप्टो खरीदते हैं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आप उसकी कीमत से जुड़ा अनुबंध ट्रेड करते हैं और वास्तविक कॉइन के मालिक नहीं बनते।

2. क्या फ्यूचर्स ट्रेडिंग स्पॉट से अधिक जोखिमपूर्ण है?

हां, सामान्यतः फ्यूचर्स ट्रेडिंग अधिक जोखिमपूर्ण होती है। लीवरेज नुकसान को बढ़ाता है और मार्जिन कम होने पर पोज़िशन लिक्विडेट हो सकती है। स्पॉट में लिक्विडेशन नहीं होता।

3. क्या स्पॉट ट्रेडिंग में बिटकॉइन को शॉर्ट किया जा सकता है?

सामान्य स्पॉट ट्रेडिंग में शॉर्ट पोज़िशन उपलब्ध नहीं होती। कीमत गिरने से मुनाफा कमाने के लिए आमतौर पर फ्यूचर्स या मार्जिन ट्रेडिंग की जरूरत होती है।

4. फ्यूचर्स में फंडिंग दर क्या होती है?

फंडिंग दर परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होने वाला समय-समय का भुगतान है। इसका उद्देश्य फ्यूचर्स और स्पॉट कीमतों को करीब रखना होता है।

5. फ्यूचर्स पोज़िशन लिक्विडेट होने पर क्या होता है?

मार्जिन रखरखाव की सीमा से नीचे जाने पर एक्सचेंज पोज़िशन को अपने आप बंद कर सकता है। इससे पोज़िशन के लिए लगाया गया कुछ या पूरा मार्जिन खो सकता है।

6. क्या स्पॉट और फ्यूचर्स दोनों में स्टॉप लॉस लगाया जा सकता है?

हां, उपलब्ध ऑर्डर सुविधाओं के अनुसार दोनों में स्टॉप लॉस लगाया जा सकता है। फ्यूचर्स में लीवरेज के कारण स्टॉप लॉस विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।

7. क्या फ्यूचर्स में वास्तविक क्रिप्टो मिलता है?

नहीं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में सामान्यतः वास्तविक क्रिप्टो का स्वामित्व नहीं मिलता। ट्रेडर केवल उसकी कीमत को ट्रैक करने वाला अनुबंध ट्रेड करता है।

8. नए भारतीय ट्रेडर को स्पॉट या फ्यूचर्स से शुरुआत करनी चाहिए?

नए ट्रेडर्स के लिए स्पॉट ट्रेडिंग तुलनात्मक रूप से सरल शुरुआती विकल्प हो सकती है। इसमें लीवरेज और लिक्विडेशन नहीं होता। फ्यूचर्स पर तभी विचार करें, जब मार्जिन, लीवरेज और जोखिम प्रबंधन अच्छी तरह समझते हों।

अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

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