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क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में प्रत्येक पोजीशन मुख्य रूप से लॉन्ग या शॉर्ट होती है। लॉन्ग पोजीशन तब खोली जाती है, जब ट्रेडर को कीमत बढ़ने की उम्मीद होती है। शॉर्ट पोजीशन तब खोली जाती है, जब कीमत गिरने की उम्मीद होती है।
स्पॉट ट्रेडिंग में आमतौर पर किसी क्रिप्टो को बेचने से पहले उसका मालिक होना जरूरी होता है। फ्यूचर्स में ट्रेडर वास्तविक कॉइन खरीदे बिना भी कीमत के बढ़ने या गिरने पर पोजीशन ले सकता है। हालांकि, दोनों दिशाओं में लेवरेज, मार्जिन और लिक्विडेशन का जोखिम रहता है।
संक्षेप में
- लॉन्ग पोजीशन में ट्रेडर कीमत बढ़ने की उम्मीद करता है।
- शॉर्ट पोजीशन में ट्रेडर कीमत गिरने की उम्मीद करता है।
- लॉन्ग और शॉर्ट दोनों में मुनाफा तथा नुकसान पूरी पोजीशन के आकार पर तय होता है।
- लेवरेज संभावित मुनाफे के साथ संभावित नुकसान भी बढ़ाता है।
- लॉन्ग पोजीशन कीमत गिरने पर और शॉर्ट पोजीशन कीमत बढ़ने पर लिक्विडेट हो सकती है।
- परपेचुअल फ्यूचर्स में फंडिंग भुगतान लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन रखने वालों के बीच हो सकता है।
- किसी भी दिशा में पोजीशन लेने से पहले लिक्विडेशन प्राइस और अधिकतम स्वीकार्य नुकसान तय करना जरूरी है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन क्या होती है?
लॉन्ग पोजीशन का अर्थ किसी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में खरीद की पोजीशन खोलना है। ट्रेडर को उम्मीद होती है कि कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उसके एंट्री प्राइस से ऊपर जाएगी।
अगर कीमत बढ़ती है और ट्रेडर ऊंची कीमत पर पोजीशन बंद करता है, तो उसे मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत गिरती है, तो नुकसान हो सकता है।
मान लीजिए BTC का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट ₹60,00,000 पर चल रहा है। एक ट्रेडर को लगता है कि इसकी कीमत बढ़ेगी और वह ₹60,00,000 पर लॉन्ग पोजीशन खोलता है।
| स्थिति | कीमत |
| एंट्री प्राइस | ₹60,00,000 |
| एग्जिट प्राइस | ₹63,00,000 |
| कीमत में बदलाव | ₹3,00,000 की बढ़त |
अगर ट्रेडर ने 0.10 BTC की पोजीशन ली है, तो फीस और फंडिंग को छोड़कर अनुमानित मुनाफा ₹30,000 होगा।
अगर BTC की कीमत ₹57,00,000 तक गिर जाती है और ट्रेडर पोजीशन बंद करता है, तो इसी मात्रा पर अनुमानित नुकसान ₹30,000 होगा।
यह उदाहरण केवल समझाने के लिए है। वास्तविक मुनाफा या नुकसान ट्रेडिंग फीस, फंडिंग भुगतान, पोजीशन की मात्रा और एग्जिट कीमत से प्रभावित होगा।
क्रिप्टो फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजीशन क्या होती है?
शॉर्ट पोजीशन का अर्थ किसी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में बिक्री की पोजीशन खोलना है। ट्रेडर को उम्मीद होती है कि कीमत गिरने के बाद वह कम कीमत पर पोजीशन बंद कर सकेगा।
अगर कीमत एंट्री प्राइस से नीचे जाती है, तो शॉर्ट पोजीशन में मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत बढ़ती है, तो नुकसान हो सकता है।
मान लीजिए ETH का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट ₹2,00,000 पर चल रहा है। ट्रेडर को लगता है कि कीमत गिर सकती है और वह ₹2,00,000 पर शॉर्ट पोजीशन खोलता है।
| स्थिति | कीमत |
| एंट्री प्राइस | ₹2,00,000 |
| एग्जिट प्राइस | ₹1,80,000 |
| कीमत में बदलाव | ₹20,000 की गिरावट |
अगर पोजीशन की मात्रा 1 ETH है, तो फीस और फंडिंग को छोड़कर अनुमानित मुनाफा ₹20,000 होगा।
अगर ETH की कीमत बढ़कर ₹2,20,000 हो जाती है और ट्रेडर पोजीशन बंद करता है, तो अनुमानित नुकसान ₹20,000 होगा।
फ्यूचर्स में शॉर्ट पोजीशन लेने के लिए ट्रेडर के पास वास्तविक ETH होना जरूरी नहीं होता। ट्रेडर मूल क्रिप्टो के बजाय उसकी कीमत से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में पोजीशन लेता है।
लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन में क्या अंतर है?
| आधार | लॉन्ग पोजीशन | शॉर्ट पोजीशन |
| कीमत को लेकर उम्मीद | कीमत बढ़ेगी | कीमत गिरेगी |
| पोजीशन कैसे खुलती है | खरीद पोजीशन | बिक्री पोजीशन |
| पोजीशन कैसे बंद होती है | बिक्री करके | वापस खरीदकर |
| मुनाफा कब होता है | एग्जिट प्राइस एंट्री से ऊपर हो | एग्जिट प्राइस एंट्री से नीचे हो |
| नुकसान कब होता है | कीमत गिरने पर | कीमत बढ़ने पर |
| लिक्विडेशन का जोखिम | कीमत तेजी से गिरने पर | कीमत तेजी से बढ़ने पर |
| सकारात्मक फंडिंग में | आमतौर पर भुगतान कर सकते हैं | आमतौर पर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं |
| नकारात्मक फंडिंग में | आमतौर पर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं | आमतौर पर भुगतान कर सकते हैं |
फंडिंग का भुगतान केवल उस समय लागू होता है, जब पोजीशन निर्धारित फंडिंग समय पर खुली हो। फंडिंग रेट और उसका समय कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार बदल सकता है।
लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन का मुनाफा या नुकसान कैसे निकाला जाता है?
लॉन्ग पोजीशन की सामान्य गणना
मुनाफा या नुकसान = एग्जिट प्राइस − एंट्री प्राइस × मात्रा
स्पष्ट गणना के लिए इसे इस तरह पढ़ें:
मुनाफा या नुकसान = एग्जिट प्राइस और एंट्री प्राइस का अंतर × पोजीशन की मात्रा
उदाहरण:
- BTC में लॉन्ग एंट्री: ₹60,00,000
- एग्जिट प्राइस: ₹64,00,000
- मात्रा: 0.25 BTC
अनुमानित मुनाफा = ₹4,00,000 × 0.25 = ₹1,00,000
शॉर्ट पोजीशन की सामान्य गणना
मुनाफा या नुकसान = एंट्री प्राइस − एग्जिट प्राइस × मात्रा
उदाहरण:
- ETH में शॉर्ट एंट्री: ₹2,00,000
- एग्जिट प्राइस: ₹1,70,000
- मात्रा: 1 ETH
अनुमानित मुनाफा = ₹30,000 × 1 = ₹30,000
इन गणनाओं में ट्रेडिंग फीस, फंडिंग भुगतान और संभावित स्लिपेज शामिल नहीं हैं।
लॉन्ग और शॉर्ट में लेवरेज कैसे काम करता है?
लेवरेज ट्रेडर को जमा किए गए मार्जिन से बड़ी पोजीशन खोलने की सुविधा देता है। इसका असर लॉन्ग और शॉर्ट दोनों पोजीशन पर समान होता है।
मान लीजिए ट्रेडर के पास ₹10,000 मार्जिन है:
| लेवरेज | कुल पोजीशन |
| 2 गुना | ₹20,000 |
| 5 गुना | ₹50,000 |
| 10 गुना | ₹1,00,000 |
| 20 गुना | ₹2,00,000 |
अगर ₹1,00,000 की पोजीशन में कीमत 5% बदलती है, तो मुनाफा या नुकसान लगभग ₹5,000 हो सकता है। ₹10,000 मार्जिन की तुलना में यह 50% बदलाव है।
इसीलिए लेवरेज मुनाफे और नुकसान दोनों को बढ़ाता है। यह केवल कम पूंजी से बड़ी पोजीशन खोलने का साधन नहीं है।
जुलाई 2026 तक WazirX के पात्र फ्यूचर्स बाजारों में 100 गुना तक लेवरेज उपलब्ध हो सकता है। उपलब्ध सीमा कॉन्ट्रैक्ट और पात्रता के अनुसार अलग हो सकती है।
अधिकतम उपलब्ध लेवरेज का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। ज्यादा लेवरेज लिक्विडेशन प्राइस को एंट्री प्राइस के करीब ला सकता है।
लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन में लिक्विडेशन कैसे होता है?
लिक्विडेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें पर्याप्त मार्जिन न रहने पर एक्सचेंज किसी पोजीशन को अपने आप बंद कर सकता है।
लॉन्ग पोजीशन में लिक्विडेशन
लॉन्ग पोजीशन में कीमत गिरने पर नुकसान बढ़ता है। अगर मार्जिन इक्विटी जरूरी मेंटेनेंस मार्जिन तक गिर जाती है, तो पोजीशन लिक्विडेट हो सकती है।
शॉर्ट पोजीशन में लिक्विडेशन
शॉर्ट पोजीशन में कीमत बढ़ने पर नुकसान बढ़ता है। अगर बाजार की कीमत लिक्विडेशन स्तर तक पहुंचती है, तो शॉर्ट पोजीशन अपने आप बंद हो सकती है।
लिक्विडेशन प्राइस इन बातों से प्रभावित होती है:
- एंट्री प्राइस
- पोजीशन का आकार
- चुना गया लेवरेज
- शुरुआती मार्जिन
- मेंटेनेंस मार्जिन
- क्रॉस या आइसोलेटेड मार्जिन
- उपलब्ध वॉलेट बैलेंस
- फंडिंग और ट्रेडिंग फीस
- मार्क प्राइस
केवल लेवरेज के आधार पर लिक्विडेशन प्राइस की सटीक गणना नहीं की जा सकती। ट्रेड से पहले प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई वास्तविक लिक्विडेशन प्राइस जांचनी चाहिए।
क्या शॉर्ट पोजीशन का नुकसान असीमित हो सकता है?
सैद्धांतिक रूप से किसी क्रिप्टो की कीमत बढ़ने की कोई निश्चित ऊपरी सीमा नहीं होती। इसलिए बिना जोखिम नियंत्रण वाली शॉर्ट पोजीशन का संभावित नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है।
फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म आमतौर पर नुकसान उपलब्ध मार्जिन से अधिक बढ़ने से पहले पोजीशन को लिक्विडेट करने का प्रयास करते हैं। फिर भी तेज कीमत बदलाव, कम तरलता या स्लिपेज नुकसान को प्रभावित कर सकते हैं।
आइसोलेटेड मार्जिन में जोखिम आमतौर पर उस पोजीशन के लिए निर्धारित मार्जिन तक सीमित रहता है। क्रॉस मार्जिन में उपलब्ध फ्यूचर्स वॉलेट बैलेंस भी पोजीशन को सहारा दे सकता है और जोखिम में आ सकता है।
फंडिंग रेट में लॉन्ग या शॉर्ट, कौन भुगतान करता है?
परपेचुअल फ्यूचर्स में फंडिंग भुगतान लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन रखने वालों के बीच होता है। इसका उद्देश्य फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की कीमत को स्पॉट कीमत के करीब रखने में मदद करना है।
सकारात्मक फंडिंग रेट
सकारात्मक फंडिंग रेट होने पर आमतौर पर:
- लॉन्ग पोजीशन रखने वाले भुगतान करते हैं।
- शॉर्ट पोजीशन रखने वाले भुगतान प्राप्त करते हैं।
- यह बाजार में लॉन्ग पोजीशन की ज्यादा मांग का संकेत हो सकता है।
नकारात्मक फंडिंग रेट
नकारात्मक फंडिंग रेट होने पर आमतौर पर:
- शॉर्ट पोजीशन रखने वाले भुगतान करते हैं।
- लॉन्ग पोजीशन रखने वाले भुगतान प्राप्त करते हैं।
- यह बाजार में शॉर्ट पोजीशन की ज्यादा मांग का संकेत हो सकता है।
फंडिंग रेट स्थिर नहीं होती। यह बाजार की स्थिति के अनुसार सकारात्मक, नकारात्मक या लगभग शून्य हो सकती है।
किसी पोजीशन को लंबे समय तक खुला रखने से पहले मौजूदा फंडिंग रेट और अगला भुगतान समय जांचना चाहिए।
लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन कब ली जा सकती है?
लॉन्ग या शॉर्ट चुनने का फैसला केवल अनुमान के आधार पर नहीं होना चाहिए। ट्रेडर आमतौर पर बाजार की दिशा, कीमत की संरचना, मात्रा और जोखिम सीमा का विश्लेषण करते हैं।
ट्रेडर लॉन्ग पर कब विचार कर सकते हैं?
- कीमत महत्वपूर्ण सपोर्ट के ऊपर बनी हो।
- चार्ट पर ऊंचे शिखर और ऊंचे निचले स्तर बन रहे हों।
- ब्रेकआउट के साथ ट्रेडिंग मात्रा बढ़ रही हो।
- बाजार की व्यापक दिशा ऊपर हो।
- जोखिम के मुकाबले संभावित मुनाफा उचित हो।
ट्रेडर शॉर्ट पर कब विचार कर सकते हैं?
- कीमत बार बार रेजिस्टेंस से नीचे लौट रही हो।
- चार्ट पर निचले शिखर और निचले निचले स्तर बन रहे हों।
- महत्वपूर्ण सपोर्ट टूट चुका हो।
- कीमत में कमजोरी के साथ बिक्री मात्रा बढ़ रही हो।
- बाजार की व्यापक दिशा नीचे हो।
इनमें से कोई भी संकेत मुनाफे की गारंटी नहीं देता। गलत समय पर ली गई लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन तेजी से नुकसान कर सकती है।
शॉर्ट पोजीशन का इस्तेमाल बचाव के लिए कैसे होता है?
शॉर्ट फ्यूचर्स का इस्तेमाल किसी स्पॉट पोर्टफोलियो के अल्पकालिक कीमत जोखिम को कम करने के लिए किया जा सकता है। इसे हेजिंग कहा जाता है।
मान लीजिए किसी ट्रेडर के पास स्पॉट वॉलेट में 0.10 BTC है। उसे लगता है कि अगले कुछ दिनों में BTC की कीमत गिर सकती है, लेकिन वह अपनी स्पॉट होल्डिंग बेचना नहीं चाहता।
ऐसी स्थिति में वह समान या कम मात्रा की शॉर्ट फ्यूचर्स पोजीशन खोल सकता है। अगर BTC की कीमत गिरती है, तो स्पॉट होल्डिंग का नुकसान शॉर्ट पोजीशन के मुनाफे से आंशिक रूप से संतुलित हो सकता है।
हेजिंग जोखिम को पूरी तरह समाप्त नहीं करती। इन बातों का असर बना रहता है:
- फंडिंग भुगतान
- ट्रेडिंग फीस
- फ्यूचर्स और स्पॉट कीमत का अंतर
- हेज पोजीशन की लिक्विडेशन
- गलत पोजीशन आकार
- बाजार में अचानक उलटी चाल
भारत में ऐसे लेनदेन का कर उपचार परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। कर संबंधी निर्णय के लिए मौजूदा आधिकारिक नियम और योग्य कर विशेषज्ञ की सलाह जांचनी चाहिए।
लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन लेते समय सामान्य गलतियां
1. केवल कीमत गिरने के कारण लॉन्ग लेना
किसी कॉइन की कीमत बहुत गिर चुकी हो, इसका अर्थ यह नहीं कि वह तुरंत बढ़ेगी। गिरता हुआ बाजार और नीचे जा सकता है।
2. तेजी के बीच बिना पुष्टि के शॉर्ट लेना
किसी कॉइन का महंगा दिखाई देना अपने आप शॉर्ट लेने का कारण नहीं है। तेज बाजार में शॉर्ट पोजीशन जल्दी लिक्विडेट हो सकती है।
3. बहुत ज्यादा लेवरेज चुनना
ज्यादा लेवरेज से सामान्य कीमत उतार चढ़ाव भी मार्जिन का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकता है।
4. लिक्विडेशन प्राइस नहीं देखना
पोजीशन खोलने से पहले लिक्विडेशन प्राइस, मार्क प्राइस और मेंटेनेंस मार्जिन जांचना जरूरी है।
5. स्टॉप लॉस तय नहीं करना
स्टॉप लॉस नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, तेज बाजार में ऑर्डर तय कीमत से अलग स्तर पर पूरा हो सकता है।
6. फंडिंग और फीस को नजरअंदाज करना
लंबे समय तक खुली पोजीशन में फंडिंग भुगतान और ट्रेडिंग फीस वास्तविक मुनाफे को कम कर सकते हैं।
7. नुकसान वाली पोजीशन में लगातार मार्जिन जोड़ना
अतिरिक्त मार्जिन लिक्विडेशन को कुछ समय के लिए दूर कर सकता है, लेकिन गलत ट्रेड को सही नहीं बनाता।
8. बड़ी घोषणा के दौरान पोजीशन खुली रखना
आर्थिक आंकड़ों, नियामक घोषणाओं या किसी बड़े बाजार समाचार के समय दोनों दिशाओं में तेज उतार चढ़ाव हो सकता है।
WazirX पर लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन
जुलाई 2026 तक WazirX फ्यूचर्स की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
| विशेषता | मौजूदा जानकारी |
| कॉन्ट्रैक्ट | रुपये में सेटल होने वाले परपेचुअल फ्यूचर्स |
| दिशा | लॉन्ग और शॉर्ट |
| लेवरेज | पात्र बाजारों में 100 गुना तक |
| मेकर फीस | 0.02% |
| टेकर फीस | 0.04% |
| उपलब्धता | WazirX ऐप और वेब |
| जोखिम उपकरण | टेक प्रॉफिट और स्टॉप लॉस |
| फंड ट्रांसफर | स्पॉट और फ्यूचर्स वॉलेट के बीच |
| शुरुआती आवश्यकता | अनिवार्य जानकारी प्रश्नोत्तरी |
उपलब्ध बाजार, लेवरेज सीमा, फीस और सुविधाएं समय के साथ बदल सकती हैं। पोजीशन खोलने से पहले कॉन्ट्रैक्ट स्क्रीन पर दिखाई गई मौजूदा जानकारी जांचें।
अंतिम विचार
लॉन्ग और शॉर्ट पोजीशन ट्रेडर को बाजार की दोनों दिशाओं में पोजीशन लेने की सुविधा देती हैं। लॉन्ग में कीमत बढ़ने की उम्मीद होती है, जबकि शॉर्ट में कीमत गिरने की।
किस दिशा को चुनना है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि ट्रेडर कितना जोखिम ले रहा है। लेवरेज, पोजीशन का आकार, लिक्विडेशन प्राइस, फंडिंग रेट और स्टॉप लॉस पहले से समझना जरूरी है।
कोई भी दिशा अपने आप सुरक्षित नहीं होती। गलत समय पर ली गई लॉन्ग पोजीशन गिरते बाजार में और शॉर्ट पोजीशन बढ़ते बाजार में तेजी से लिक्विडेट हो सकती है। छोटे पोजीशन आकार से शुरुआत करें और अधिकतम नुकसान पहले तय करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्रिप्टो फ्यूचर्स में लॉन्ग का क्या मतलब है?
लॉन्ग का अर्थ खरीद की फ्यूचर्स पोजीशन खोलना है। ट्रेडर को उम्मीद होती है कि कीमत एंट्री प्राइस से ऊपर जाएगी। कीमत बढ़ने पर मुनाफा और गिरने पर नुकसान हो सकता है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स में शॉर्ट का क्या मतलब है?
शॉर्ट का अर्थ बिक्री की फ्यूचर्स पोजीशन खोलना है। ट्रेडर को उम्मीद होती है कि कीमत गिरेगी। कीमत गिरने पर मुनाफा और बढ़ने पर नुकसान हो सकता है।
क्या वास्तविक क्रिप्टो रखे बिना शॉर्ट किया जा सकता है?
हां। फ्यूचर्स में ट्रेडर मूल क्रिप्टो के बजाय उसकी कीमत से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड करता है। इसलिए वास्तविक कॉइन का मालिक हुए बिना शॉर्ट पोजीशन खोली जा सकती है।
क्या लॉन्ग पोजीशन में पूरा मार्जिन खो सकता है?
हां। अगर बाजार पोजीशन के विपरीत जाता है और मार्जिन जरूरी स्तर से नीचे गिरता है, तो पोजीशन लिक्विडेट हो सकती है। आइसोलेटेड मार्जिन में उस पोजीशन के लिए तय रकम जोखिम में रहती है।
क्या शॉर्ट पोजीशन लॉन्ग से ज्यादा जोखिम वाली होती है?
दोनों में बड़ा जोखिम हो सकता है। शॉर्ट में कीमत बढ़ने की सैद्धांतिक सीमा नहीं होती, जबकि लॉन्ग में कीमत शून्य तक गिर सकती है। लेवरेज दोनों दिशाओं में लिक्विडेशन का जोखिम बढ़ाता है।
क्या लॉन्ग और शॉर्ट दोनों एक साथ लिक्विडेट हो सकते हैं?
अलग अलग कीमत स्तरों और समय पर दोनों तरफ की पोजीशन लिक्विडेट हो सकती हैं। तेज बाजार बदलाव में पहले एक दिशा की लिक्विडेशन कीमत को और आगे धकेल सकती है, जिसके बाद उलटी दिशा की पोजीशन भी प्रभावित हो सकती हैं।
लॉन्ग या शॉर्ट में से किसे चुनना चाहिए?
यह बाजार की दिशा, तकनीकी संरचना, जोखिम क्षमता और समय अवधि पर निर्भर करता है। केवल अनुमान के आधार पर पोजीशन लेने के बजाय स्पष्ट एंट्री, स्टॉप लॉस और अधिकतम नुकसान तय करना चाहिए।
क्या क्रिप्टो फ्यूचर्स से होने वाली आय पर भारत में कर लगता है?
क्रिप्टो फ्यूचर्स का कर उपचार कॉन्ट्रैक्ट की प्रकृति, प्लेटफॉर्म और वर्तमान नियमों पर निर्भर कर सकता है। इसे बिना आधिकारिक स्पष्टीकरण के हर स्थिति में एक समान नहीं माना जाना चाहिए। मौजूदा सरकारी मार्गदर्शन और योग्य कर विशेषज्ञ की सलाह जांचें।
अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।





