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भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग ऐसे ट्रेडर्स के बीच लोकप्रिय हो रही है, जो किसी क्रिप्टो को सीधे खरीदे बिना उसकी कीमत में होने वाले बदलाव के आधार पर ट्रेड करना चाहते हैं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में कीमत बढ़ने और गिरने, दोनों स्थितियों के अनुसार पोज़िशन ली जा सकती है।
हालांकि, फ्यूचर्स ट्रेडिंग सामान्य क्रिप्टो खरीदने की तुलना में अधिक जटिल और जोखिमपूर्ण होती है। इसमें लेवरेज, मार्जिन, फंडिंग शुल्क, मार्क प्राइस और लिक्विडेशन जैसे विषयों को समझना जरूरी है।
इस गाइड में हम आसान भाषा में समझेंगे कि भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स क्या है, यह कैसे काम करता है और WazirX पर भारतीय रुपये में फ्यूचर्स ट्रेडिंग कैसे शुरू की जा सकती है।
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संक्षेप में
- क्रिप्टो फ्यूचर्स एक ऐसा अनुबंध है, जो बिटकॉइन या किसी अन्य क्रिप्टो की कीमत को ट्रैक करता है।
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग में वास्तविक क्रिप्टो खरीदना जरूरी नहीं होता।
- कीमत बढ़ने की उम्मीद में लॉन्ग और कीमत गिरने की उम्मीद में शॉर्ट पोज़िशन ली जाती है।
- लेवरेज कम मार्जिन से बड़ी पोज़िशन खोलने की सुविधा देता है, लेकिन नुकसान का जोखिम भी बढ़ाता है।
- WazirX फ्यूचर्स में मार्जिन, मुनाफा और सेटलमेंट भारतीय रुपये में हो सकता है।
- ट्रेड खोलने से पहले लिक्विडेशन प्राइस, शुल्क, फंडिंग दर और स्टॉप लॉस की जांच करना जरूरी है।
भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स क्या है?
क्रिप्टो फ्यूचर्स एक वित्तीय अनुबंध है, जिसमें ट्रेडर किसी क्रिप्टो की कीमत में भविष्य में होने वाले बदलाव के आधार पर पोज़िशन लेता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपको लगता है कि बिटकॉइन की कीमत बढ़ सकती है, तो आप बिटकॉइन फ्यूचर्स में लॉन्ग पोज़िशन खोल सकते हैं। अगर कीमत बढ़ती है, तो आपको मुनाफा हो सकता है।
इसके विपरीत, अगर आपको लगता है कि बिटकॉइन की कीमत गिर सकती है, तो आप शॉर्ट पोज़िशन खोल सकते हैं। कीमत गिरने पर शॉर्ट पोज़िशन में मुनाफा हो सकता है।
फ्यूचर्स ट्रेडिंग में सामान्यतः ट्रेडर वास्तविक बिटकॉइन या दूसरे क्रिप्टो का मालिक नहीं बनता। वह केवल उस क्रिप्टो की कीमत को ट्रैक करने वाले अनुबंध में ट्रेड करता है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग कैसे काम करती है?
क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग में ट्रेडर एक निश्चित कीमत पर लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन खोलता है। पोज़िशन का मुनाफा या नुकसान एंट्री प्राइस और एग्ज़िट प्राइस के अंतर पर निर्भर करता है।
मान लीजिए बिटकॉइन फ्यूचर्स की कीमत ₹60 लाख है।
आपको लगता है कि इसकी कीमत बढ़ेगी, इसलिए आप लॉन्ग पोज़िशन खोलते हैं। अगर कीमत ₹61 लाख तक पहुंचती है और आप पोज़िशन बंद करते हैं, तो कीमत के अंतर के आधार पर मुनाफा हो सकता है।
अगर बिटकॉइन की कीमत आपकी उम्मीद के विपरीत गिरती है, तो पोज़िशन में नुकसान होगा।
फ्यूचर्स ट्रेडिंग में परिणाम केवल कीमत के बदलाव पर निर्भर नहीं करता। पोज़िशन का आकार, लेवरेज, ट्रेडिंग शुल्क, फंडिंग भुगतान और ऑर्डर के एग्ज़िक्यूशन की कीमत भी मुनाफे या नुकसान को प्रभावित कर सकती है।
लॉन्ग और शॉर्ट पोज़िशन क्या होती हैं?
लॉन्ग पोज़िशन
जब ट्रेडर को लगता है कि किसी क्रिप्टो की कीमत बढ़ेगी, तो वह लॉन्ग पोज़िशन खोलता है।
उदाहरण:
- एंट्री प्राइस: ₹60 लाख
- एग्ज़िट प्राइस: ₹62 लाख
- पोज़िशन: लॉन्ग
इस स्थिति में कीमत बढ़ने पर ट्रेडर को मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत गिरती है, तो नुकसान हो सकता है।
शॉर्ट पोज़िशन
जब ट्रेडर को लगता है कि किसी क्रिप्टो की कीमत गिर सकती है, तो वह शॉर्ट पोज़िशन खोलता है।
उदाहरण:
- एंट्री प्राइस: ₹60 लाख
- एग्ज़िट प्राइस: ₹58 लाख
- पोज़िशन: शॉर्ट
इस स्थिति में कीमत गिरने पर मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत बढ़ती है, तो शॉर्ट पोज़िशन में नुकसान हो सकता है।
स्पॉट ट्रेडिंग और फ्यूचर्स ट्रेडिंग में अंतर
स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच सबसे बड़ा अंतर क्रिप्टो के स्वामित्व, लेवरेज और लिक्विडेशन से जुड़ा है।
| आधार | स्पॉट ट्रेडिंग | फ्यूचर्स ट्रेडिंग |
| क्रिप्टो का स्वामित्व | वास्तविक क्रिप्टो खरीदा जाता है | कीमत पर आधारित अनुबंध में ट्रेड होता है |
| मुनाफे का अवसर | सामान्यतः कीमत बढ़ने पर | कीमत बढ़ने और गिरने, दोनों स्थितियों में |
| लेवरेज | सामान्यतः उपलब्ध नहीं | उपलब्ध हो सकता है |
| लिक्विडेशन | नहीं होता | हो सकता है |
| होल्डिंग अवधि | कोई निश्चित अवधि नहीं | अनुबंध के प्रकार पर निर्भर |
| जोखिम | तुलनात्मक रूप से कम | अधिक |
| जटिलता | अपेक्षाकृत आसान | अधिक तकनीकी |
| सेटलमेंट | क्रिप्टो या भारतीय रुपये में | अनुबंध के अनुसार भारतीय रुपये या अन्य संपत्ति में |
स्पॉट ट्रेडिंग में ट्रेडर बिटकॉइन खरीदकर उसे अपने एक्सचेंज खाते या वॉलेट में रखता है। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में ट्रेडर वास्तविक बिटकॉइन का मालिक नहीं बनता।
परपेचुअल फ्यूचर्स क्या होते हैं?
परपेचुअल फ्यूचर्स ऐसे फ्यूचर्स अनुबंध होते हैं, जिनकी कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं होती।
पारंपरिक फ्यूचर्स अनुबंध किसी तय तारीख पर समाप्त हो सकते हैं। इसके विपरीत, परपेचुअल फ्यूचर्स पोज़िशन तब तक खुली रह सकती है, जब तक ट्रेडर स्वयं उसे बंद नहीं करता या वह लिक्विडेट नहीं होती।
परपेचुअल फ्यूचर्स की कीमत को स्पॉट बाजार की कीमत के करीब रखने के लिए फंडिंग दर का उपयोग किया जाता है। फंडिंग भुगतान आमतौर पर लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच होता है।
WazirX पर भारतीय रुपये में सेटल होने वाले परपेचुअल फ्यूचर्स उपलब्ध हैं। इनमें मार्जिन, मुनाफा और नुकसान भारतीय रुपये में कैलकुलेट और सेटल हो सकता है।
भारतीय रुपये में क्रिप्टो फ्यूचर्स क्या हैं?
भारतीय रुपये में क्रिप्टो फ्यूचर्स ऐसे अनुबंध हैं, जिनमें मार्जिन, मुनाफा, नुकसान और सेटलमेंट रुपये में होता है।
कई वैश्विक फ्यूचर्स मंचों पर ट्रेडर को पहले भारतीय रुपये से यूएसडीटी खरीदना पड़ता है। इसके बाद यूएसडीटी को मार्जिन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय रुपये में सेटल होने वाले फ्यूचर्स में यह अतिरिक्त बदलाव जरूरी नहीं होता। ट्रेडर सीधे रुपये का इस्तेमाल करके पोज़िशन खोल सकता है।
WazirX फ्यूचर्स में ट्रेडर्स अपने स्पॉट वॉलेट से फ्यूचर्स वॉलेट में रुपये ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे मुनाफा, नुकसान और उपलब्ध मार्जिन को रुपये में समझना आसान हो सकता है।
लेवरेज क्या है?
लेवरेज कम पूंजी की मदद से बड़ी ट्रेडिंग पोज़िशन खोलने की सुविधा है।
मान लीजिए आपके पास ₹1,000 का मार्जिन है और आप 5 गुना लेवरेज चुनते हैं। इस स्थिति में आपकी कुल पोज़िशन का आकार ₹5,000 हो सकता है।
| मार्जिन | लेवरेज | कुल पोज़िशन |
| ₹1,000 | 1 गुना | ₹1,000 |
| ₹1,000 | 2 गुना | ₹2,000 |
| ₹1,000 | 5 गुना | ₹5,000 |
| ₹1,000 | 10 गुना | ₹10,000 |
अगर ₹5,000 की पोज़िशन में कीमत 5% बढ़ती है, तो लगभग ₹250 का कुल मुनाफा हो सकता है। अगर कीमत 5% गिरती है, तो लगभग ₹250 का नुकसान हो सकता है।
यह केवल एक आसान उदाहरण है। इसमें ट्रेडिंग शुल्क, फंडिंग शुल्क, स्लिपेज और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।
WazirX फ्यूचर्स में अधिकतम 10 गुना तक लेवरेज उपलब्ध हो सकता है। उपलब्ध लेवरेज अलग-अलग अनुबंधों और मंच के मौजूदा नियमों के अनुसार बदल सकता है।
अधिक लेवरेज का अर्थ केवल अधिक संभावित मुनाफा नहीं है। इससे लिक्विडेशन और नुकसान का जोखिम भी बढ़ जाता है।
मार्जिन क्या होता है?
मार्जिन वह राशि है, जिसे फ्यूचर्स पोज़िशन खोलने और बनाए रखने के लिए सुरक्षा राशि के रूप में रखा जाता है।
शुरुआती मार्जिन
शुरुआती मार्जिन वह न्यूनतम राशि है, जो नई पोज़िशन खोलने के लिए जरूरी होती है।
अगर आप ₹10,000 की पोज़िशन 5 गुना लेवरेज के साथ खोलते हैं, तो लगभग ₹2,000 का शुरुआती मार्जिन जरूरी हो सकता है।
रखरखाव मार्जिन
रखरखाव मार्जिन वह न्यूनतम राशि है, जिसे पोज़िशन चालू रखने के लिए बनाए रखना जरूरी होता है।
अगर नुकसान के कारण आपका मार्जिन रखरखाव की जरूरी सीमा से नीचे चला जाता है, तो पोज़िशन लिक्विडेट हो सकती है।
लिक्विडेशन क्या है?
लिक्विडेशन वह स्थिति है, जिसमें एक्सचेंज बढ़ते नुकसान को नियंत्रित करने के लिए आपकी पोज़िशन को अपने आप बंद कर देता है।
यह आमतौर पर तब होता है, जब ट्रेडर का उपलब्ध मार्जिन रखरखाव की जरूरी सीमा से नीचे चला जाता है।
मान लीजिए आपने अधिक लेवरेज के साथ लॉन्ग पोज़िशन खोली है। अगर कीमत तेजी से गिरती है, तो आपका मार्जिन जल्दी कम हो सकता है। लिक्विडेशन प्राइस तक पहुंचने पर पोज़िशन अपने आप बंद हो सकती है।
इसीलिए पोज़िशन खोलने से पहले इन जानकारियों की जांच करना जरूरी है:
- लिक्विडेशन प्राइस
- पोज़िशन का आकार
- चुना गया लेवरेज
- उपलब्ध मार्जिन
- स्टॉप लॉस स्तर
- फंडिंग दर
- ट्रेडिंग शुल्क
अधिक लेवरेज के कारण कुछ स्थितियों में नुकसान शुरुआती मार्जिन से अधिक भी हो सकता है। फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू करने से पहले मंच के जोखिम संबंधी नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
आइसोलेटेड मार्जिन और क्रॉस मार्जिन में अंतर
आइसोलेटेड मार्जिन
आइसोलेटेड मार्जिन में किसी एक पोज़िशन के लिए एक निश्चित मार्जिन अलग रखा जाता है।
अगर वह पोज़िशन लिक्विडेट होती है, तो सामान्यतः उसी पोज़िशन के लिए रखा गया मार्जिन प्रभावित होता है। इससे फ्यूचर्स वॉलेट के बाकी बैलेंस पर प्रभाव सीमित किया जा सकता है।
क्रॉस मार्जिन
क्रॉस मार्जिन में फ्यूचर्स वॉलेट का उपलब्ध बैलेंस पोज़िशन को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
इससे कुछ स्थितियों में लिक्विडेशन को टाला जा सकता है। हालांकि, बाजार विपरीत दिशा में जाने पर फ्यूचर्स वॉलेट का बड़ा हिस्सा जोखिम में आ सकता है।
शुरुआती ट्रेडर्स के लिए आइसोलेटेड मार्जिन के साथ प्रत्येक पोज़िशन के जोखिम को अलग-अलग नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
फंडिंग शुल्क क्या होता है?
फंडिंग शुल्क परपेचुअल फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट ट्रेडर्स के बीच समय-समय पर होने वाला भुगतान है।
अगर फंडिंग दर सकारात्मक है, तो सामान्यतः लॉन्ग ट्रेडर्स शॉर्ट ट्रेडर्स को भुगतान करते हैं। अगर फंडिंग दर नकारात्मक है, तो शॉर्ट ट्रेडर्स लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान कर सकते हैं।
फंडिंग शुल्क एक्सचेंज की सामान्य ट्रेडिंग फीस से अलग होता है। पोज़िशन को लंबे समय तक खुला रखने पर फंडिंग भुगतान कुल मुनाफे या नुकसान को प्रभावित कर सकता है।
ट्रेड खोलने से पहले मौजूदा फंडिंग दर और अगला फंडिंग समय जरूर जांचें।
मेकर शुल्क और टेकर शुल्क क्या हैं?
मेकर और टेकर शुल्क इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपका ऑर्डर ऑर्डर बुक में नई तरलता जोड़ता है या पहले से उपलब्ध ऑर्डर से तुरंत मेल खाता है।
मेकर ऑर्डर
मेकर ऑर्डर ऑर्डर बुक में तरलता जोड़ता है। ऐसा लिमिट ऑर्डर, जो तुरंत पूरा नहीं होता, मेकर ऑर्डर बन सकता है।
टेकर ऑर्डर
टेकर ऑर्डर पहले से उपलब्ध तरलता का उपयोग करता है। मार्केट ऑर्डर सामान्यतः टेकर ऑर्डर माना जाता है।
जुलाई 2026 तक WazirX फ्यूचर्स की घोषित ट्रेडिंग फीस:
| ऑर्डर का प्रकार | फ्यूचर्स शुल्क |
| मेकर | 0.02% |
| टेकर | 0.04% |
शुल्क की दर समय के साथ बदल सकती है। ट्रेड करने से पहले WazirX ऐप या सहायता केंद्र पर मौजूदा शुल्क की जांच करें।
स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट क्या हैं?
स्टॉप लॉस
स्टॉप लॉस एक ऐसा ऑर्डर है, जो कीमत के पहले से तय स्तर पर पहुंचने के बाद पोज़िशन को बंद करने में मदद करता है।
इसका उद्देश्य संभावित नुकसान को एक तय सीमा तक नियंत्रित करना होता है।
टेक प्रॉफिट
टेक प्रॉफिट ऑर्डर कीमत के लक्ष्य स्तर तक पहुंचने पर पोज़िशन को बंद करने में मदद करता है।
इससे ट्रेडर बाजार को लगातार देखे बिना अपना मुनाफे का लक्ष्य तय कर सकता है।
हालांकि, स्टॉप लॉस नुकसान रोकने की गारंटी नहीं देता। तेज उतार-चढ़ाव या कम तरलता के दौरान ऑर्डर तय कीमत से अलग स्तर पर पूरा हो सकता है।
WazirX पर क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग कैसे शुरू करें?
WazirX पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आपका खाता और केवाईसी पूरा होना चाहिए।
1: WazirX खाता बनाएं
WazirX ऐप डाउनलोड करें या आधिकारिक वेबसाइट पर खाता बनाएं।
अपना मोबाइल नंबर, ईमेल पता और जरूरी जानकारी दर्ज करें।
2: केवाईसी पूरा करें
फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू करने के लिए जरूरी केवाईसी और खाता सत्यापन पूरा करें।
सभी जानकारी अपने आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार भरें।
3: फ्यूचर्स की शुरुआती प्रक्रिया पूरी करें
WazirX ऐप में नीचे उपलब्ध फ्यूचर्स भाग खोलें।
जोखिम से जुड़ी जानकारी पढ़ें और फ्यूचर्स ज्ञान परीक्षा या जरूरी शुरुआती चरण पूरे करें।
4: फ्यूचर्स वॉलेट में रुपये ट्रांसफर करें
अपने स्पॉट या मुख्य वॉलेट से जरूरी रुपये फ्यूचर्स वॉलेट में ट्रांसफर करें।
शुरुआत में केवल उतनी राशि का इस्तेमाल करें, जिसका नुकसान आप आर्थिक रूप से संभाल सकते हैं।
5: ट्रेडिंग जोड़ी चुनें
उपलब्ध भारतीय रुपया फ्यूचर्स अनुबंधों में से अपनी पसंद की ट्रेडिंग जोड़ी चुनें।
अनुबंध चुनने से पहले तरलता, ट्रेडिंग वॉल्यूम, कीमत में बदलाव और फंडिंग दर की जांच करें।
6: लॉन्ग या शॉर्ट चुनें
कीमत बढ़ने की उम्मीद हो तो लॉन्ग और कीमत गिरने की उम्मीद हो तो शॉर्ट पोज़िशन चुनें।
7: लेवरेज और ऑर्डर का प्रकार तय करें
अपना लेवरेज, मार्जिन और पोज़िशन का आकार सावधानी से दर्ज करें।
अपनी रणनीति के अनुसार मार्केट ऑर्डर या लिमिट ऑर्डर चुनें।
8: स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट लगाएं
पोज़िशन खोलने से पहले तय करें कि आप अधिकतम कितना नुकसान स्वीकार कर सकते हैं।
इसके आधार पर स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफिट स्तर लगाएं।
9: पोज़िशन पर नजर रखें
खुली हुई पोज़िशन में इन जानकारियों को नियमित रूप से देखें:
- एंट्री प्राइस
- मार्क प्राइस
- लिक्विडेशन प्राइस
- बिना बुक किया गया मुनाफा या नुकसान
- मार्जिन अनुपात
- अगला फंडिंग समय
ऐप का रास्ता और उपलब्ध सुविधाएं ऐप के नए संस्करणों के साथ बदल सकती हैं।
मार्क प्राइस और आखिरी ट्रेड कीमत में अंतर
आखिरी ट्रेड कीमत
आखिरी ट्रेड कीमत वह कीमत है, जिस पर फ्यूचर्स अनुबंध का सबसे हाल का ट्रेड पूरा हुआ है।
मार्क प्राइस
मार्क प्राइस एक गणना की गई संदर्भ कीमत है। इसका इस्तेमाल बिना बुक किए गए मुनाफे, नुकसान और लिक्विडेशन की गणना में किया जा सकता है।
मार्क प्राइस किसी एक असामान्य ट्रेड या कीमत में अचानक आए बदलाव के प्रभाव को सीमित करने में मदद करता है।
लिक्विडेशन के जोखिम को समझने के लिए केवल चार्ट पर दिखाई देने वाली कीमत नहीं, बल्कि मार्क प्राइस भी देखना जरूरी है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स के फायदे
1. बढ़ते और गिरते बाजार में ट्रेड
फ्यूचर्स में लॉन्ग और शॉर्ट, दोनों तरह की पोज़िशन उपलब्ध होती हैं। इससे ट्रेडर बाजार की अलग-अलग दिशाओं के अनुसार रणनीति बना सकता है।
2. लेवरेज की सुविधा
लेवरेज कम पूंजी से बड़ी पोज़िशन खोलने की सुविधा देता है।
हालांकि, इसी कारण नुकसान और लिक्विडेशन का जोखिम भी बढ़ता है।
3. पोर्टफोलियो की सुरक्षा
स्पॉट बाजार में क्रिप्टो रखने वाला ट्रेडर कीमत में गिरावट के जोखिम को सीमित करने के लिए शॉर्ट फ्यूचर्स पोज़िशन का इस्तेमाल कर सकता है।
इसे हेजिंग कहा जाता है। गलत पोज़िशन आकार के कारण हेजिंग में भी अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।
4. भारतीय रुपये में सेटलमेंट
भारतीय रुपये में सेटल होने वाले अनुबंधों में मुनाफे और नुकसान को रुपये में समझना आसान हो सकता है।
5. निश्चित समाप्ति तिथि नहीं
परपेचुअल फ्यूचर्स की कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं होती। ट्रेडर अपनी रणनीति के अनुसार पोज़िशन बंद कर सकता है। हालांकि, फंडिंग शुल्क लागू हो सकता है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स के प्रमुख जोखिम
अधिक लेवरेज का जोखिम
अधिक लेवरेज में कीमत का छोटा बदलाव भी मार्जिन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
लिक्विडेशन का जोखिम
अगर बाजार तेजी से पोज़िशन की विपरीत दिशा में जाता है, तो पोज़िशन अपने आप बंद हो सकती है।
अधिक उतार-चढ़ाव
क्रिप्टो बाजार चौबीसों घंटे चलता है। कीमत रात, सप्ताहांत या किसी वैश्विक घटना के दौरान तेजी से बदल सकती है।
फंडिंग का खर्च
पोज़िशन लंबे समय तक खुली रखने पर फंडिंग भुगतान कुल मुनाफे को कम कर सकता है।
स्लिपेज
तेज बाजार में ऑर्डर अपेक्षित कीमत से अलग स्तर पर पूरा हो सकता है।
भावनात्मक ट्रेडिंग
जल्दबाजी, नुकसान के बाद बदला लेने जैसी ट्रेडिंग और लगातार लेवरेज बढ़ाना बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।
तकनीकी जोखिम
इंटरनेट की समस्या, ऐप में देरी, व्यवस्था का रखरखाव या ऑर्डर पूरा होने में समस्या भी ट्रेड को प्रभावित कर सकती है।
शुरुआती ट्रेडर्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू करने से पहले लेवरेज, मार्जिन और लिक्विडेशन जैसे विषयों को समझना जरूरी है।
इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:
- शुरुआत में कम लेवरेज का इस्तेमाल करें।
- एक ट्रेड में पूरे फ्यूचर्स बैलेंस का इस्तेमाल न करें।
- हर पोज़िशन के साथ स्टॉप लॉस लगाएं।
- लिक्विडेशन प्राइस से पहले बाहर निकलने की योजना बनाएं।
- अधिक उतार-चढ़ाव के समय मार्केट ऑर्डर सावधानी से लगाएं।
- फंडिंग शुल्क और ट्रेडिंग फीस को गणना में शामिल करें।
- केवल सोशल मीडिया की सलाह के आधार पर ट्रेड न करें।
- अपने प्रत्येक ट्रेड का रिकॉर्ड रखें।
- नुकसान के बाद पोज़िशन का आकार बढ़ाकर रकम वापस पाने की कोशिश न करें।
- केवल उतनी राशि का इस्तेमाल करें, जिसका नुकसान संभाला जा सके।
क्या भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग कानूनी है?
भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर कोई सामान्य और स्पष्ट पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, क्रिप्टो को भारत में वैध मुद्रा का दर्जा प्राप्त नहीं है।
भारत में काम करने वाले क्रिप्टो मंचों को केवाईसी, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम और एफआईयू-आईएनडी से जुड़ी लागू अनुपालन आवश्यकताओं का पालन करना पड़ सकता है।
क्रिप्टो फ्यूचर्स को सेबी द्वारा नियंत्रित शेयर बाजार के फ्यूचर्स और ऑप्शंस के समान नहीं समझना चाहिए।
भारत में क्रिप्टो से जुड़े नियम समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी मंच का इस्तेमाल करने से पहले उसकी अनुपालन नीतियां, शर्तें और जोखिम संबंधी जानकारी जरूर पढ़ें।
भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स पर टैक्स कैसे लगता है?
WazirX सहायता केंद्र के अनुसार, भारतीय रुपये में सेटल होने वाले क्रिप्टो फ्यूचर्स से होने वाली आय को फ्यूचर्स और ऑप्शंस की तरह व्यावसायिक आय माना जा सकता है।
इन अनुबंधों में वास्तविक वर्चुअल डिजिटल एसेट का सीधा ट्रांसफर नहीं होता और सेटलमेंट भारतीय रुपये में होता है। इसलिए WazirX फ्यूचर्स के प्रत्येक ट्रेड पर सामान्य 1% वर्चुअल डिजिटल एसेट टीडीएस लागू नहीं किया जाता।
यह टैक्स व्यवस्था सीधे स्पॉट क्रिप्टो खरीदने और बेचने की व्यवस्था से अलग हो सकती है।
सीधे वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर से हुई आय पर आयकर अधिनियम की धारा 115बीबीएच के अंतर्गत 30% टैक्स के साथ लागू अधिभार और उपकर का प्रावधान हो सकता है।
टैक्स का सही वर्गीकरण ट्रेडिंग की आवृत्ति, आय के प्रकार और व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति पर निर्भर कर सकता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लें।
क्या फ्यूचर्स ट्रेडिंग सभी के लिए सही है?
नहीं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग उन लोगों के लिए सही नहीं हो सकती, जो लेवरेज, मार्जिन, फंडिंग शुल्क और लिक्विडेशन को पूरी तरह नहीं समझते।
नए उपयोगकर्ता पहले स्पॉट बाजार, ऑर्डर के प्रकार और जोखिम प्रबंधन को समझ सकते हैं। फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू करते समय छोटी पोज़िशन और कम लेवरेज का इस्तेमाल अधिक नियंत्रित तरीका हो सकता है।
फ्यूचर्स को जल्दी मुनाफा कमाने का तरीका नहीं समझना चाहिए। इसमें पूंजी का बड़ा हिस्सा खोने की वास्तविक संभावना होती है।
निष्कर्ष
क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडर्स को बढ़ते और गिरते, दोनों बाजारों में पोज़िशन लेने की सुविधा देते हैं। भारतीय रुपये में सेटल होने वाले फ्यूचर्स मुद्रा बदलने की जरूरत को कम कर सकते हैं और मुनाफे तथा नुकसान को रुपये में समझना आसान बना सकते हैं।
हालांकि, लेवरेज फ्यूचर्स ट्रेडिंग को अधिक जोखिम वाला बनाता है। कीमत में छोटा बदलाव भी बड़ा नुकसान या लिक्विडेशन पैदा कर सकता है।
किसी भी ट्रेड से पहले पोज़िशन का आकार, स्टॉप लॉस, ट्रेडिंग शुल्क, फंडिंग दर और लिक्विडेशन प्राइस जांचें। शुरुआत कम लेवरेज और सीमित पूंजी से करें। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में किसी रणनीति से अधिक जरूरी अनुशासित जोखिम प्रबंधन है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स क्या है?
क्रिप्टो फ्यूचर्स एक ऐसा अनुबंध है, जो बिटकॉइन या किसी दूसरे क्रिप्टो की कीमत को ट्रैक करता है। ट्रेडर वास्तविक क्रिप्टो खरीदे बिना लॉन्ग या शॉर्ट पोज़िशन ले सकता है।
2. क्या क्रिप्टो फ्यूचर्स में वास्तविक बिटकॉइन मिलता है?
नहीं। क्रिप्टो फ्यूचर्स में सामान्यतः ट्रेडर वास्तविक बिटकॉइन का मालिक नहीं बनता। वह बिटकॉइन की कीमत को ट्रैक करने वाले अनुबंध में ट्रेड करता है।
3. लॉन्ग और शॉर्ट का क्या अर्थ है?
लॉन्ग पोज़िशन कीमत बढ़ने की उम्मीद में ली जाती है। शॉर्ट पोज़िशन कीमत गिरने की उम्मीद में ली जाती है। बाजार विपरीत दिशा में जाने पर नुकसान हो सकता है।
4. क्रिप्टो फ्यूचर्स में लेवरेज क्या है?
लेवरेज कम मार्जिन से बड़ी पोज़िशन खोलने की सुविधा है। उदाहरण के लिए, 10 गुना लेवरेज में ₹1,000 के मार्जिन से ₹10,000 की पोज़िशन बनाई जा सकती है।
5. क्या फ्यूचर्स ट्रेडिंग में पूरी राशि खो सकती है?
हां। अधिक लेवरेज और तेज उतार-चढ़ाव के कारण पोज़िशन लिक्विडेट हो सकती है। इसलिए कम लेवरेज, सीमित पोज़िशन और स्टॉप लॉस का इस्तेमाल जरूरी है।
6. क्या WazirX फ्यूचर्स के लिए यूएसडीटी जरूरी है?
नहीं। WazirX के भारतीय रुपये में सेटल होने वाले फ्यूचर्स में मार्जिन, मुनाफा और सेटलमेंट रुपये में हो सकता है। ट्रेडर को पहले भारतीय रुपये को यूएसडीटी में बदलने की जरूरत नहीं होती।
7. WazirX फ्यूचर्स की ट्रेडिंग फीस कितनी है?
जुलाई 2026 तक घोषित मेकर शुल्क 0.02% और टेकर शुल्क 0.04% है। शुल्क समय के साथ बदल सकता है। ट्रेड से पहले ऐप या आधिकारिक सहायता केंद्र पर मौजूदा दर जांचें।
8. क्या भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स पर 1% टीडीएस लगता है?
WazirX सहायता केंद्र के अनुसार, भारतीय रुपये में सेटल होने वाले उसके फ्यूचर्स अनुबंधों में वास्तविक वर्चुअल डिजिटल एसेट का सीधा ट्रांसफर नहीं होता। इसलिए प्रत्येक फ्यूचर्स ट्रेड पर सामान्य 1% वर्चुअल डिजिटल एसेट टीडीएस लागू नहीं किया जाता।
अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।


